नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के मामले में युवा कांग्रेस की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है। संगठन ने दिल्ली पुलिस के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया गया था।
युवा कांग्रेस के मुताबिक, संगठन के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे की पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख किया था। इसके बाद अदालत ने मामले को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
25 सितंबर के प्रदर्शन की अनुमति हुई थी खारिज
युवा कांग्रेस की ओर से दायर याचिका में दिल्ली पुलिस के 1 अक्टूबर के आदेश को चुनौती दी गई है। पुलिस ने इस आदेश के जरिए 25 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित करीब 100 से 150 लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था।
संगठन का कहना है कि प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, अनुशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े सभी नियमों का पालन करने का आश्वासन दिया गया था।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का दिया हवाला
याचिका युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के माध्यम से संगठन के लीगल सेल के चेयरमैन अधिवक्ता रूपेश सिंह भदौरिया ने दायर की है।
युवा कांग्रेस ने याचिका में कहा है कि शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति का अधिकार मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। संगठन का दावा है कि प्रशासनिक विवेक के आधार पर इस अधिकार पर मनमाने तरीके से रोक नहीं लगाई जा सकती।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि किसी सार्वजनिक प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो वह प्रतिबंध कानून के अनुरूप, आवश्यक और परिस्थितियों के अनुपात में होना चाहिए।
शुक्रवार की सुनवाई पर नजर
युवा कांग्रेस को उम्मीद है कि दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को मामले की सुनवाई करेगा। अदालत में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के प्रदर्शन की अनुमति से इनकार करने के आधार और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार से जुड़े कानूनी पहलुओं पर चर्चा हो सकती है।
फिलहाल मामले में अदालत के रुख और आगे की कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हैं।