नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन करने की अनिवार्यता को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने दिल्ली पुलिस के इस दिशा-निर्देश पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी घटना के तत्काल विरोध के लिए लोगों को 10 दिन पहले आवेदन करने की शर्त से बांधना व्यावहारिक नहीं है।
राजेंद्र पाल गौतम ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए 10 दिन पहले आवेदन की बात सामने आना चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसी घटनाएं अचानक होती हैं, जिन पर राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों को तत्काल प्रतिक्रिया देने की जरूरत पड़ती है।
दिल्ली पुलिस ने जारी किए दिशा-निर्देश
दिल्ली पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर किसी भी सभा, धरने या प्रदर्शन के लिए पहले से अनुमति लेना जरूरी है। इसके लिए प्रस्तावित कार्यक्रम से कम से कम 10 दिन पहले आवेदन संबंधित पुलिस कार्यालय में जमा करना होगा।
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए अनुमति की व्यवस्था कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई है। भीड़ के आकार के आधार पर प्रदर्शन के लिए अलग-अलग स्थान भी निर्धारित किए गए हैं।
जंतर-मंतर पर 1,000 लोगों तक की अनुमति
निर्धारित व्यवस्था के तहत जंतर-मंतर पर अधिकतम 1,000 लोगों तक के प्रदर्शन की अनुमति दी जा सकती है। इससे अधिक संख्या में लोगों के जुटने वाले कार्यक्रमों के लिए अन्य निर्धारित स्थानों का उपयोग किया जाएगा।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थलों के निर्धारण और अनुमति प्रक्रिया के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों का भी हवाला दिया है। पुलिस के मुताबिक, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के साथ सार्वजनिक व्यवस्था और आम नागरिकों की सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
कांग्रेस ने जताई आपत्ति
कांग्रेस का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी महत्वपूर्ण या अचानक सामने आए मुद्दे पर तत्काल विरोध दर्ज कराने का अधिकार महत्वपूर्ण है। पार्टी ने 10 दिन पहले आवेदन की शर्त को लेकर सवाल उठाते हुए कहा है कि अचानक हुई घटना के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए इतनी लंबी पूर्व सूचना देना कई परिस्थितियों में संभव नहीं होगा।
फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए अनुमति की प्रक्रिया और समय-सीमा को लेकर कांग्रेस की आपत्ति के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।