भुवनेश्वर । ओडिशा के ई-चालान सिस्टम में ऐसी गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिन्हें जानकर कोई भी हैरान हो सकता है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में ऐसे हजारों मामलों का पता चला है, जहां कार और अन्य चार पहिया वाहनों पर हेलमेट नहीं पहनने तथा दोपहिया वाहनों पर सीटबेल्ट नहीं लगाने के चालान दर्ज किए गए।
ऑडिट के दौरान कुल 7,774 ऐसे चालान सामने आए, जिनमें वाहन की श्रेणी और दर्ज किए गए ट्रैफिक उल्लंघन के बीच ही मेल नहीं था।
कार में हेलमेट और बाइक में सीटबेल्ट!
CAG की जांच के मुताबिक, 4,786 तीन और चार पहिया वाहनों के खिलाफ हेलमेट नहीं पहनने से संबंधित नियम के तहत चालान दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल 47.86 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
इसी तरह 2,988 दोपहिया वाहनों के खिलाफ सीटबेल्ट नहीं पहनने से संबंधित प्रावधान के तहत चालान दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल 29.88 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
यानी दोनों तरह की गड़बड़ियों को मिलाकर 7,774 चालान दर्ज हुए।
आखिर गलती कहां हुई?
ऑडिट में सामने आया कि ई-चालान सिस्टम में जानकारी दर्ज करते समय कई मामलों में वाहन की श्रेणी या ट्रैफिक नियम का सही विकल्प चयनित नहीं हुआ।
उदाहरण के तौर पर, बिना हेलमेट का चालान दर्ज करते समय वाहन की श्रेणी में बाइक या स्कूटर की जगह कार दर्ज हो गई। वहीं सीटबेल्ट से जुड़े चालान में कुछ मामलों में कार की जगह दोपहिया वाहन की श्रेणी दर्ज कर दी गई।
इससे सिस्टम में ऐसे रिकॉर्ड तैयार हो गए, जिनमें कार के लिए हेलमेट और बाइक के लिए सीटबेल्ट का उल्लंघन दर्ज था।
रिपोर्ट से यह सवाल भी उठता है कि यदि वाहन का नंबर दर्ज करते समय सिस्टम अपने आप वाहन की श्रेणी की पुष्टि करे, तो ऐसी गलतियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
दोनों उल्लंघनों पर 1,000 रुपये जुर्माना
हेलमेट नहीं पहनने और सीटबेल्ट नहीं लगाने जैसे उल्लंघनों पर 1,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। समस्या नियम में नहीं, बल्कि चालान दर्ज करते समय वाहन की श्रेणी से जुड़ी जानकारी में हुई गड़बड़ी में सामने आई।
ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में भी मिली गड़बड़ी
CAG ऑडिट में सिर्फ ई-चालान सिस्टम ही नहीं, बल्कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में भी अनियमितताएं सामने आईं।
ऑडिट में 29,154 ऐसे मामले मिले, जहां लाइसेंस के लिए जिस श्रेणी के वाहन का आवेदन किया गया था, ड्राइविंग टेस्ट के दौरान इस्तेमाल किया गया वाहन उससे अलग था।
मसलन, किसी व्यक्ति ने चार पहिया वाहन चलाने के लाइसेंस के लिए आवेदन किया, लेकिन उसका ड्राइविंग टेस्ट दोपहिया वाहन से लिया गया। कुछ मामलों में इसका उल्टा भी पाया गया।
सिस्टम की निगरानी पर उठे सवाल
CAG की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए ये मामले ई-चालान और ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में डेटा एंट्री और सत्यापन की व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं।
वाहन की सही श्रेणी को नियम के उल्लंघन से जोड़कर सत्यापित करने और ड्राइविंग टेस्ट में आवेदन के अनुरूप वाहन इस्तेमाल करने की व्यवस्था ऐसी गड़बड़ियों को रोकने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल, ऑडिट में सामने आए इन मामलों ने ओडिशा के ट्रैफिक और परिवहन सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली डिजिटल प्रक्रियाओं की निगरानी और सत्यापन व्यवस्था को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।