नागोया । भारतीय बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने अपने जन्मदिन के दिन शानदार प्रदर्शन करते हुए एशियन गेम्स में पहला स्वर्ण पदक जीत लिया। 75 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में लवलीना ने चीन की बाओ जियी को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
लवलीना की इस जीत के साथ एशियन गेम्स की महिला बॉक्सिंग में भारत को 12 साल बाद स्वर्ण पदक मिला है। इससे पहले 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम ने 51 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड जीता था।
पिछले एशियाड के सिल्वर को गोल्ड में बदला
लवलीना ने पिछले एशियन गेम्स में भी फाइनल तक का सफर तय किया था, लेकिन तब उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। इस बार उन्होंने अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए फाइनल में चीनी बॉक्सर बाओ जियी को हराकर पदक का रंग बदल दिया।
यह जीत लवलीना के लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि 2 अक्टूबर को उनका जन्मदिन है। ऐसे में एशियन गेम्स का गोल्ड उनके लिए जन्मदिन का यादगार तोहफा बन गया।
भारतीय बॉक्सर्स ने पक्के किए छह पदक
एशियन गेम्स में भारतीय बॉक्सिंग दल का प्रदर्शन भी शानदार रहा है। लवलीना के स्वर्ण पदक से पहले भारत के कई मुक्केबाज पदक पक्के कर चुके हैं।
प्रिया घणघस (60 किग्रा), कपिल पोखरिया (90 किग्रा) और नरेंद्र बरवाल (90 किग्रा+) ने कांस्य पदक जीते हैं। वहीं परवीन हुड्डा (65 किग्रा) और अंकुश पंघाल (80 किग्रा) भी स्वर्ण पदक के लिए मुकाबले में उतरने वाले हैं।
हालांकि, एशियन गेम्स में भारतीय बॉक्सिंग का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अभी भी 2010 ग्वांगझू गेम्स का है। उस प्रतियोगिता में भारतीय मुक्केबाजों ने कुल 9 पदक जीते थे, जिसमें 2 स्वर्ण, 3 रजत और 4 कांस्य पदक शामिल थे।
हार से सबक लेकर वापसी
लवलीना इस एशियन गेम्स में मजबूत वापसी के इरादे से उतरी थीं। इससे पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्हें ऑस्ट्रेलिया की एमा-सू ग्रीनट्री के खिलाफ हार के बाद सिल्वर मेडल मिला था।
उस हार के बाद लवलीना ने अपनी कमियों पर काम किया और मुकाबलों में छोटी-छोटी गलतियों से बचने पर ध्यान दिया। एशियन गेम्स के फाइनल में उनके प्रदर्शन ने दिखाया कि उनकी मेहनत का नतीजा उन्हें मिला है।
अपने जन्मदिन पर जीता यह स्वर्ण पदक लवलीना के करियर की यादगार उपलब्धियों में शामिल हो गया है।