KPSC भर्ती परीक्षा में बड़ा घोटाला? 14 टॉपर्स से जुड़े पैटर्न मिले, 11 उम्मीदवारों के 1.52 करोड़ ट्रांजैक्शन की जांच

बेंगलुरु । कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) की वेटरनरी ऑफिसर भर्ती परीक्षा को लेकर कथित पेपर लीक और भर्ती घोटाले की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, परीक्षा से पहले कुछ उम्मीदवारों को कथित तौर पर लीक हुए सवालों के जवाब उपलब्ध कराए गए और उन्हें बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित रिजॉर्ट तथा विला में ले जाकर तैयारी कराई गई।

जनवरी 2026 में हुई इस परीक्षा में करीब 1,400 उम्मीदवार शामिल हुए थे, जबकि 400 पदों पर भर्ती होनी थी। अब CID और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में परीक्षा की प्रक्रिया और कुछ उम्मीदवारों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।

14 टॉपर्स के जवाबों में मिली असामान्य समानता

जांच एजेंसियों ने परीक्षा में शीर्ष रैंक हासिल करने वाले 14 उम्मीदवारों के उत्तरों का विश्लेषण किया। रिपोर्ट के मुताबिक, इन उम्मीदवारों के सही और गलत उत्तरों के पैटर्न में असामान्य समानता पाई गई।

जांच में Statistical Probability Test का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। एजेंसियों का दावा है कि इस विश्लेषण से ऐसे संकेत मिले कि इन उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले कुछ सवालों की जानकारी मिली हो सकती है।

हालांकि, इस विश्लेषण को पेपर लीक का अंतिम प्रमाण मानने से पहले जांच और न्यायिक प्रक्रिया का पूरा होना जरूरी है।

परीक्षा से एक दिन पहले रिजॉर्ट में ले जाने का आरोप

मामले में सबसे गंभीर आरोप परीक्षा से एक दिन पहले की गतिविधियों को लेकर हैं। ED के अनुसार, कथित तौर पर लीक हुआ प्रश्नपत्र बिचौलिये बसवराज कन्नाले तक पहुंचा था।

इसके बाद कुछ उम्मीदवारों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित एक रिजॉर्ट में ले जाने का आरोप है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि वहां उम्मीदवारों को करीब 60 से 80 सवाल उपलब्ध कराए गए और उनके जवाबों की तैयारी कराई गई।

CID की जांच में भी कुछ उम्मीदवारों को विला और रिजॉर्ट में ले जाने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। आरोप है कि अगले दिन इन उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया गया।

11 उम्मीदवारों से जुड़े 1.52 करोड़ के लेन-देन की जांच

जांच में कथित वित्तीय लेन-देन भी सामने आया है। CID और ED के मुताबिक, अब तक 11 उम्मीदवारों से जुड़े करीब 1.52 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन की जांच की जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, बैकलॉग कैटेगरी में पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर आने वाले उम्मीदवारों से कथित तौर पर 50-50 लाख रुपये लिए जाने का आरोप है।

इसके अलावा, 84वीं रैंक वाले एक उम्मीदवार से परीक्षा के बाद OMR शीट में कथित हेरफेर के लिए 30 लाख रुपये मांगे जाने का आरोप सामने आया है। ED के मुताबिक, कुछ उम्मीदवारों से 30 से 40 लाख रुपये तक लिए जाने की भी जांच हो रही है।

एजेंसी कथित रकम के बैंक ट्रांजैक्शन, नकद भुगतान और सोने की खरीद से जुड़े मनी ट्रेल की भी जांच कर रही है।

IAS अधिकारी और बिचौलिया जांच के केंद्र में

मामले की जांच में KPSC के तत्कालीन कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार का नाम सामने आया है। वह 2016 बैच के IAS अधिकारी हैं।

ED के अनुसार, परीक्षा नियंत्रक के पद पर रहते हुए उनके पास प्रश्नपत्र को अंतिम रूप देने, उसकी छपाई और परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों की कस्टडी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां थीं। CID ने उन्हें 29 अगस्त को गिरफ्तार किया था, जबकि ED ने 18 सितंबर को गिरफ्तार किया।

दूसरा प्रमुख नाम बसवराज कन्नाले का है। उस पर उम्मीदवारों और कथित पेपर लीक नेटवर्क के बीच बिचौलिए की भूमिका निभाने तथा परीक्षा में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर पैसे लेने का आरोप है। ED ने उसे सितंबर में गिरफ्तार किया था।

KPSC की दूसरी भर्तियां भी जांच के दायरे में

जांच अब केवल वेटरनरी ऑफिसर भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं है। ED यह भी जांच कर रही है कि क्या KPSC की दूसरी भर्ती परीक्षाओं में भी पैसे लेकर उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग या चयन को प्रभावित करने की कोशिश हुई।

एजेंसी के अनुसार, एक KPSC अधिकारी के यहां से मिली कथित रफ डायरी में कुछ उम्मीदवारों के नाम के सामने रकम लिखे होने की जानकारी मिली है। इस आधार पर संभावित मनी ट्रेल और चयन प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप की जांच की जा रही है।

KPSC सदस्य डॉ. शांता होसमानी की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई है। एजेंसियां एक चयनित KAS उम्मीदवार और उनके बीच परीक्षा से पहले हुई कथित फोन कॉल्स की जांच कर रही हैं।

हाईकोर्ट ने SIT जांच का दिया निर्देश

मामले ने अब न्यायिक स्तर पर भी गंभीर रूप ले लिया है। 21 सितंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट ने KPSC से जुड़े कथित घोटालों की जांच के लिए SIT (Special Investigation Team) गठित करने का निर्देश दिया।

फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित पेपर लीक नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे, किन उम्मीदवारों ने पैसे दिए और किस स्तर तक परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हुई।

वहीं, पैसे देने के आरोपी सभी उम्मीदवारों की गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है। जांच एजेंसियां प्रत्येक उम्मीदवार की कथित भूमिका के आधार पर आगे की कार्रवाई तय कर रही हैं। मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए सामने आए आरोपों को अदालत में साबित होना बाकी है।

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