नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स टीम ने कुल 24 पदक जीतकर अपना अभियान पूरा किया, लेकिन पिछले एशियन गेम्स की तुलना में इस बार स्वर्ण पदकों की संख्या में बड़ी गिरावट देखने को मिली। भारत ने 2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में एथलेटिक्स में 6 स्वर्ण, 14 रजत और 9 कांस्य सहित 29 पदक जीते थे। इस बार पदकों की कुल संख्या घटकर 24 रह गई और स्वर्ण पदक केवल एक रहा।
इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह कई प्रमुख खिलाड़ियों का चोटिल होना, कुछ खिलाड़ियों का प्रतियोगिता से बाहर होना और कई स्पर्धाओं में मामूली अंतर से पदक हाथ से निकल जाना रहा।
6 गोल्ड में से सिर्फ एक बचा
हांगझोऊ में भारत ने एथलेटिक्स में छह स्वर्ण पदक जीते थे। इस बार पिछले गेम्स के किसी भी व्यक्तिगत स्वर्ण को भारत डिफेंड नहीं कर सका।
शॉटपुट में पिछले एशियन गेम्स के चैंपियन तजिंदरपाल सिंह तूर इस बार स्वर्ण की जगह रजत पदक जीत सके। पुरुष और महिला जैवलिन थ्रो में भारत के पिछले स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा और अन्नू रानी इस बार चोट के कारण एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले सके।
3000 मीटर स्टीपलचेज में अविनाश साबले भी अपना पिछला प्रदर्शन दोहरा नहीं सके। चोट के बाद वापसी कर रहे साबले इस बार पदक से चूककर चौथे स्थान पर रहे। वहीं 5000 मीटर में पिछली चैंपियन पारुल चौधरी भी अपना स्वर्ण बरकरार नहीं रख सकीं।
पुरुष 4×400 मीटर रिले में भी भारत को पिछले प्रदर्शन से नीचे रहना पड़ा। पिछली बार की स्वर्ण पदक विजेता टीम के कई सदस्यों की जगह इस बार नए खिलाड़ियों को मौका मिला और टीम कांस्य पदक तक पहुंच सकी।
चोटों ने बढ़ाई मुश्किल
एशियन गेम्स के दौरान कई भारतीय एथलीट चोट से जूझते नजर आए। ज्योति याराजी 100 मीटर हर्डल्स की हीट में उतरने से पहले ही दर्द के कारण प्रतियोगिता से बाहर हो गईं। पिछले एशियन गेम्स में उन्होंने रजत पदक जीता था और इस बार भी उनसे पदक की उम्मीद थी।
लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर भी चोट के कारण अपना पूरा जोर नहीं लगा सके। ट्रिपल जंपर प्रवीण चित्रवेल के प्रयास भी चोट से प्रभावित हुए और उनके सभी जंप फाउल रहे।
अविनाश साबले ने भी चोट की आशंका के चलते 5000 मीटर में हिस्सा नहीं लिया। पिछली बार वह इस स्पर्धा में रजत पदक जीत चुके थे।
कुछ पदक बेहद मामूली अंतर से हाथ से निकले
भारत के कई एथलीट पदक जीतने के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन अंतिम क्षणों में मामूली अंतर से चूक गए।
महिला ट्रिपल जंप में आशा इलांगो का सर्वश्रेष्ठ प्रयास 13.83 मीटर रहा। चीन की ली यी ने भी 13.83 मीटर की छलांग लगाई। टाई होने के बाद दूसरे सर्वश्रेष्ठ प्रयास के आधार पर फैसला हुआ, जिसमें ली यी आगे रहीं और आशा पदक से चूक गईं।
महिला लॉन्ग जंप में शैली सिंह भी कांस्य पदक की स्थिति में थीं, लेकिन चीन की तान मेंगई ने अंतिम प्रयास में 6.46 मीटर की छलांग लगाकर उन्हें पोडियम से बाहर कर दिया।
शैली सिंह के एक प्रयास की माप को लेकर भी विवाद हुआ। भारतीय पक्ष ने इस फैसले के खिलाफ CAS जाने का निर्णय लिया है।
चौथे स्थान ने भी बढ़ाई निराशा
भारत के कई एथलीट पदक की दौड़ में बने रहे, लेकिन अंतिम सूची में चौथे स्थान पर रहे। अविनाश साबले के अलावा कुछ अन्य स्पर्धाओं में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक के करीब पहुंचकर चुनौती पेश की।
इन नतीजों ने यह दिखाया कि भारतीय एथलेटिक्स में प्रतिस्पर्धा का स्तर बढ़ा है, लेकिन छोटे अंतर को पदक में बदलना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
कुछ स्पर्धाओं में बना नया इतिहास
कम स्वर्ण पदकों के बावजूद भारतीय एथलेटिक्स अभियान में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां भी दर्ज हुईं।
महिला पोल वॉल्ट में बारानिका इलांगोवन ने कांस्य पदक जीतकर एशियन गेम्स के इतिहास में इस स्पर्धा में भारत का पहला पदक हासिल किया।
सीमा कुमारी ने महिला 10,000 मीटर में कांस्य पदक जीतकर लंबे अंतराल के बाद भारत को इस स्पर्धा में पदक दिलाया। वहीं पूजा सिंह ने महिला हाई जंप में कांस्य जीतकर इस स्पर्धा में भारत के लंबे पदक सूखे को खत्म किया।
मैराथन में सावन बरवाल ने रजत पदक जीतकर भारत के लिए लंबे अंतराल के बाद इस स्पर्धा में पदक हासिल किया।
24 पदकों की कहानी क्या बताती है?
भारत के लिए 2026 का एशियन गेम्स एथलेटिक्स अभियान आंकड़ों में पिछले गेम्स से कमजोर रहा। 29 से घटकर 24 पदक और 6 से घटकर 1 स्वर्ण—ये आंकड़े साफ तौर पर अंतर दिखाते हैं।
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। कई नई स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते, कुछ एथलीट रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ पोडियम तक पहुंचे और कई युवा खिलाड़ियों ने बड़े मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
यानी भारतीय एथलेटिक्स के लिए इस एशियन गेम्स की कहानी सिर्फ घटे हुए स्वर्ण पदकों की नहीं है। यह चोट, करीबी मुकाबलों, नए खिलाड़ियों के उभरने और कुछ स्पर्धाओं में ऐतिहासिक पदक हासिल करने की भी कहानी है।