उदयपुर । राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने राजस्थान और उत्तराखंड के अपने परिचालन क्षेत्रों में व्यापक स्वास्थ्य एवं पोषण जागरूकता अभियान चलाया। कंपनी के स्वास्थ्य सेवा प्रोजेक्ट के तहत ‘मेरा गांव, स्वस्थ गांव’ पहल के माध्यम से आयोजित इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण समुदायों को बेहतर पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक करना रहा।
एक महीने चले इस अभियान के दौरान विभिन्न गांवों में जागरूकता सत्र, स्वास्थ्य परामर्श, प्रदर्शन गतिविधियां और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनके माध्यम से 1,540 से अधिक ग्रामीणों तक पहुंच बनाई गई, जिसमें 1,061 से अधिक महिलाओं और किशोरियों ने हिस्सा लिया।
मातृ एवं किशोरी स्वास्थ्य पर रहा जोर
अभियान में गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के पोषण, एनीमिया की रोकथाम, स्तनपान, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। महिलाओं और किशोरियों को संतुलित आहार तथा दैनिक जीवन में पौष्टिक खानपान की आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रमों में पंचायती राज संस्थानों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों, समेकित बाल विकास सेवा, शिक्षा विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, महिला पर्यवेक्षकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग रहा। इससे सरकारी योजनाओं और पोषण संबंधी जागरूकता गतिविधियों को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने में मदद मिली।
बच्चों के पहले 1,000 दिनों के महत्व की दी जानकारी
‘मेरा गांव, स्वस्थ गांव’ के तहत आयोजित सत्रों में संतुलित आहार और आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों के साथ बच्चों के जीवन के पहले 1,000 दिनों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
ग्रामीणों को गर्भावस्था के दौरान आवश्यक देखभाल, आयरन और कैल्शियम सप्लीमेंट, स्तनपान तथा बच्चों के उचित पोषण के बारे में जानकारी दी गई। किशोरियों के लिए आयोजित विशेष सत्रों में आयरन युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन और पर्याप्त पोषण के महत्व पर जागरूकता बढ़ाई गई।

स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थ अपनाने की सलाह
अभियान के दौरान ग्रामीण परिवारों को स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। बाजरा, दालें, मौसमी सब्जियां, फल, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, सूखे मेवे और बीज जैसे पौष्टिक विकल्पों की जानकारी दी गई।
वहीं, शर्करा युक्त पेय पदार्थों, पैकेज्ड स्नैक्स और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करने की सलाह दी गई।
अभियान के तहत महिलाओं, किशोरियों, बच्चों और अन्य ग्रामीणों ने पोषण शपथ लेकर अपने परिवार और समुदाय में स्वस्थ खानपान एवं जीवनशैली अपनाने का संकल्प भी लिया।
परामर्श के साथ रेफरल और फॉलो-अप सहायता
स्वास्थ्य सेवा प्रोजेक्ट के तहत उपलब्ध प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ग्रामीणों को पोषण संबंधी परामर्श, आवश्यकतानुसार रेफरल और फॉलो-अप सहायता भी प्रदान की गई। कंपनी के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य जागरूकता के साथ-साथ समुदायों में स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार में सकारात्मक बदलाव को बढ़ावा देना है।
हिंदुस्तान जिंक, वेदांता समूह की कंपनी, शिक्षा, कौशल विकास, आजीविका संवर्धन, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण सहित विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक विकास कार्यक्रम संचालित कर रही है। कंपनी के अनुसार, उसकी पहलें 4,100 से अधिक गांवों तक पहुंच बना रही हैं और 26 लाख से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रही हैं। कंपनी ने वर्ष 2030 के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप समावेशी विकास और दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।