नई दिल्ली। देश में बदलते जनसांख्यिकीय पैटर्न को समझने के लिए केंद्र सरकार की ओर से गठित हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेस (HLCDC) ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से विस्तृत जानकारी मांगी है। रिपोर्टों के मुताबिक कमेटी ने 35 सवालों वाली प्रश्नावली के जरिए पिछले 15 वर्षों से जुड़े कई तरह के आंकड़े मांगे हैं। इनमें कुछ आंकड़े धर्मवार और जिला स्तर पर उपलब्ध कराने को कहा गया है।
मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई राज्यों के विभाग सामान्य तौर पर अपने रिकॉर्ड धर्म के आधार पर नहीं रखते। ऐसे में 15 साल का धर्मवार डेटा जुटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है।
किन-किन क्षेत्रों से मांगी गई जानकारी?
रिपोर्टों के अनुसार कमेटी की प्रश्नावली में जन्म पंजीकरण, स्कूलों में दाखिला, वाहन पंजीकरण, प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन और मतदाता पंजीकरण जैसे क्षेत्रों से जुड़े आंकड़े शामिल हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में आधार, राशन कार्ड और वोटर आईडी में असामान्य वृद्धि से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई है।
कमेटी ने धार्मिक स्थलों की जिला स्तर की जानकारी और उनकी GIS मैपिंग से संबंधित विवरण भी मांगा है। रिपोर्टों में अनुसूचित जनजातियों के बीच धार्मिक बदलाव, कथित अवैध प्रवासियों की पहचान, हिरासत और डिपोर्टेशन तथा फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मामलों की जानकारी मांगे जाने की बात कही गई है।
राज्यों के सामने डेटा जुटाने की मुश्किल
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सरकारी विभागों में अधिकांश रिकॉर्ड नियमित रूप से धर्म के आधार पर दर्ज नहीं किए जाते। रिपोर्ट के अनुसार जन्म पंजीकरण और अवैध प्रवासियों से जुड़े कुछ रिकॉर्ड को छोड़ दें तो कई विभागों के पास मांगी गई जानकारी उसी प्रारूप में उपलब्ध नहीं है।
इसका मतलब यह है कि राज्यों को अलग-अलग विभागों के पुराने रिकॉर्ड को छांटकर कमेटी के सवालों के अनुरूप जानकारी तैयार करनी पड़ सकती है। यही वजह है कि कई राज्यों के अधिकारी इस प्रक्रिया को लेकर कठिनाई जता रहे हैं।
कमेटी का गठन क्यों किया गया?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 26 मई 2026 को हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेस का गठन किया था। गृह मंत्रालय के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक कमेटी का उद्देश्य अवैध आव्रजन और अन्य असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करना तथा उनसे निपटने के उपाय सुझाना है। इसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर कर रहे हैं।
1 जुलाई 2026 को कमेटी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की थी। गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर कमेटी से जुड़ी गतिविधियों और उसके काम में मंत्रालय की सहायता के लिए बैठकों का भी उल्लेख है।
धर्मवार डेटा को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?
इस कवायद ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है। विपक्षी नेताओं ने कमेटी द्वारा मांगे जा रहे धर्मवार आंकड़ों के उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को कमेटी की कथित डेटा कवायद की आलोचना की और इसके पीछे सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। यह उनका राजनीतिक आरोप है; केंद्र सरकार की ओर से कमेटी का घोषित उद्देश्य जनसांख्यिकीय बदलावों, अवैध आव्रजन और उनसे जुड़े प्रशासनिक उपायों का अध्ययन करना है।
इसलिए फिलहाल दो अलग पहलुओं को अलग-अलग देखना जरूरी है—एक तरफ कमेटी का आधिकारिक घोषित दायरा, और दूसरी तरफ विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे राजनीतिक और नीतिगत सवाल।
आगे क्या होगा?
कमेटी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से जानकारी जुटाने के बाद देश में जनसांख्यिकीय बदलावों के पैटर्न का अध्ययन करेगी। इसके आधार पर वह प्रशासनिक, नीतिगत और कानूनी उपायों से जुड़ी सिफारिशें दे सकती है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यही है कि जिन विभागों ने वर्षों से रिकॉर्ड धर्मवार प्रारूप में नहीं रखा है, वे मांगी गई 15 साल की जानकारी को किस तरह संकलित करते हैं। इसी डेटा के आधार पर कमेटी के अध्ययन का अगला चरण आगे बढ़ेगा।