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ईमानदार अफसर का बेईमान काम?
एक आईएएस अफसर की पूरे सिस्टम में सबसे ईमानदार अफसर की इमेज है। शायद वह ईमानदार होंगे भी, इसीलिए उनके पास सभी आईएएस अफसरों से ज्यादा विभागों के दायित्व हैं। लेकिन जब ईमानदार अफसर के कामों में बेईमानी नजर आने लगे, तो इसे क्या समझा जाए? खैर अफसर ईमानदार हैं या फिर काम बेईमान है यह तो बहस का विषय है। लेकिन इस ईमानदार अफसर की एक स्कीम ने कौडिय़ों की जमीनों की कीमत करोड़ों तक पहुंच दी है। तो वहीं करोड़ों की जमीन के मालिक अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। जिस स्कीम के लिए जमीनों को लिया गया है, उसका भी कोई वास्तविक स्वरुप नक्शे में नहीं दिख रहा है। नियमों की अनदेखी के भी आरोप लगने लगे हैं। बहरहाल अब न्यायालय को तय करना है कि इस ईमानदार अफसर ने यह बेईमान काम क्यों किया?
फिज़ा न बदले, इसलिए तस्वीर बदल दी
बीते सप्ताह भाजपा ने छत्तीसगढ़ की राजनीतिक तस्वीर ही बदल दी है। यह तस्वीर इसलिए बदली गई है ताकि यहां की राजनीतिक फिज़ा न बदले। प्रदेश संगठन में हुए अहम बदलाव ने यह तय कर दिया है कि अब सत्ता में भी जल्द बदलाव होंगे। कहा जा रहा है कि संगठन में बदलाव के साथ ही तकरीबन आधा दर्जन मंत्रियों की विदाई भी तय कर दी गई है। यह बात अलग है कि अभी इसके लिए समय मुर्करर नहीं किया गया है। केन्द्रीय नेतृत्व राज्य के सभी नेताओं के परफारमेंस और तामाम गतिविधियों पर नजर बनाये हुए है। स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ राज्य का प्रभारी बनाना इस बात पर बल देता है कि मोदी और शाह के लिए छत्तीसगढ़ की सत्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है। दरअसल यह बात इसलिए कही जा रहा है क्योंकि स्मृति ईरानी मोदी और शाह की अत्यंत विश्वसनीय मानी जाती हैं। इसके साथ ही भाजपा स्मृति ईरानी को राज्यसभा भेजने पर भी विचार कर रही है। वहीं सत्ता और संगठन के बीच मचे द्वंद्व के कारण पवन साय को झारखंड भेजा गया है। पवन साय की जगह अब कर्मवीर सिंह को छत्तीसगढ़ की कमान सौंपी गई है। निश्चित ही कर्मवीर सिंह छत्तीसगढ़ में 2028 के कर्मवीरों की सूची तैयार करेगें।
समाज सेवा की मिशाल
वैसे तो रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह अपने अंदाज में काम करते हैं। शायद इसीलिए विष्णु सरकार में सबसे अधिक समय तक राजधानी रायपुर में उन्हें कलेक्टरी करने का अवसर मिला। समाज सेवा के प्रति उनका सर्मपण एक अनोखा मिशाल बन गया है। गौरव सिंह आईएएस के रुप में तो अपने दायित्वों का निर्वहन कर ही रहे हैं, साथ ही वह उन चुनिंदा नागरिकों में भी शामिल हो गए हैं जो मरने के बाद भी समाज के काम आते हैं। दरअसल आईएएस गौरव सिंह और उनकी धर्मपत्नि ने देहदान का ऐलान किया है। यहीं नहीं उनके प्रयास से तकरीबन 100 से अधिक व्यक्तियों ने देहदान करने की घोषणा की है। इसके साथ ही एक दिन में 2000 से अधिक महिलाओं ने ब्लड डोनेशन कर गोल्डन बुक में रिकार्ड दर्ज किया है। आम तौर पर महिलाएं ब्लड डोनेशन में पीछे रहती है, लेकिन गौरव सिंह ने यह साबित कर दिया की यदि कोई भी काम लक्ष्य निर्धारित करके किया जाए तो मंजिल जरुर मिलती है।
मत बनिए शुतुरमुर्ग?
धर्म-कर्म हर हिन्दू और सनातनी का परम कर्तव्य है। लेकिन धर्म की आड़ में यदि धंधा शुरु कर दिया जाए तो पतन तय है। आजकल राजधानी में कुछ ऐसी ही तस्वीरें सामने आने लगी हैं। धन के बलबूते पर कुछ लोग बड़े-बड़े धार्मिक आयोजन कर जमीन लूटने का काम कर रहे हैं। इस लूट को देखकर, सुनकर और जानकर भी पूरा सिस्टम खामोश है? निश्चित ही सिस्टम के चंद लोग भी इस लूट के अप्रत्यक्ष सहभागी बन गए हैं। लेकिन लूट में शामिल लोगों का हाल ठीक उस शुतुरमुर्ग की भांति है, जिसे लगता है कि उसे कोई नहीं देख रहा है, लेकिन लोगों को सब कुछ दिखाई देता है। खैर ताजा मामला नवा रायपुर एयरपोर्ट के नजदीक का है, जहां पर एक कारेाबारी के खिलाफ जमीन लूटने की फरियाद थाने तक पहुंच गई थी, लेकिन कहा जा रहा है कि मामले को शटल कर दिया गया है। सवाल यह है कि कितने मामले शटल किये जाएंगे? और कब तक धर्म की आड़ में जमीन लूटने यह खेल चलेगा? यहां पीडित का दर्द सुनने, जानने वाला कोई नहीं है। सिस्टम के लोगों को कोई रुचि भी नहीं है, लेकिन याद रहे, इस लूट का शिकार कोई भी हो सकता है। आज बंगाली, तो कल माराठी, परसों बिहारी तो आगे छत्तीसगढिय़ा भी। इसलिए शुतुरमुर्ग मत बनिए।
मंत्री बंगले में दो-दो हाथ
जब चारों ओर कमीशनखोरी का खुला खेल शुरु हो जाए, तो दो-दो हांथ की नौबत आ ही जाती है। दरअसल कुछ मंत्रियों के यहां सप्लाई का इन दिनों खुला खेल चल रहा है। जाहिर सी बात है ठेकेदार सप्लाई के लिए नियम और शर्तें अपने अनुरुप ही तैयार करवाते हैं, और जब नियम शर्तों में बॉस का अघोषित अप्रूवल मिल जाए तो फिर भला पीए और ओएसडी की कौन सुनता है। यहां भी कुछ ऐसा ही हुआ, बॉस के अघोषित अप्रूवल के बाद भी ओएसडी साहब ने साहबगीरी दिखा दी, नियम-प्रक्रिया का अडंगा लगा दिया। फिर क्या सप्लायर का पारा चढ़ते देर नहीं लगा, बंगले में ही ओएसडी और सप्लायर भीड़ गए। दोनो में जमकर नोक-झोंक हुई, एक-दूसरे को देख लेने की धमकियां भी दी गई। कहा जा रहा है कि मामले को बढ़ता देख, वहां उपस्थित लोगों ने दोनो को शांत कराया। अब मामला तो शांत हो गया पर कमीशनखोरी की खबरें इन दिनों खूब चर्चा में हैं।
बैज ने युवाओं का नाम क्यों नहीं गिनाया?
इन दिनों कांग्रेस पार्टी या यूं कहें कि राहुल गांधी आक्रामक रुप से काम कर रहे हैं। विभिन्न राज्यों में चुनावी फार्मूलों का खाका भी तैयार कर लिया गया है। राहुल गांधी पूरी कांग्रेस को युवा बनाने में जुटे हुए हैं। इसके विपरीत प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का बयान सभी को आश्चर्य करने वाला है। दरअसल हाल ही में दीपक बैज ने 2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर बयान दिया था। बैज ने कहा था कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री पद के लिए कई वरिष्ठ और योग्य नेता हैं। इसमें सर्वप्रथम डॉ. चरणदास महंत, टीएस सिंहदेव, भूपेश बघेल और ताम्रध्वज साहू के नाम गिनाए गए थे। दरअसल दीपक बैज यह भली-भांति जानते हैं कि आलाकमान का फोकस इन दिनों युवाओं पर है, उसके बाद भी उनकी सूची में एक भी युवा दावेदार का नाम नहीं सुनने को मिला? बैज यह जानते है कि इन तामाम नेताओं के बाद वह सबसे युवा नेता हैं और वर्तमान में पीसीसी चीफ का दायितव निभा रहे हैं, ऐसे में और युवा दावेदारों का नाम गिनाना जोखिम लेना होगा। हालांकि टी.एस. सिंहदेव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते दीपक बैज का नाम भी संभावित दावेदारों की सूची में शामिल होना चाहिए।
अखबार आभाव-प्रभाव से परे रहा है
सैल्यूट है पत्रकार रितिका चोपड़ा को जो इस सोशल मीडिया के दौर में कलम की ताकत को दिखा दिया। रितिका की एक रिपोर्ट ने पूरे देश को सड़क पर उतार दिया, यही पत्रकार की ताक़त है। अगर रितिका की खबर में ताकत ना होती तो अब तक मामला दर्ज हो जाता। इंडियन एक्सप्रेस के संपादक और रितिका चोपड़ा के पास कानूनी नोटिसों की बाढ़ आ जाती। याद रहे सिर्फ सनसनी ही खबर नहीं है, बल्कि खबर दायित्व भी है। इतिहास गवाह है, दौर कोई भी रहा हो अखबार अभाव-प्रभाव से सदैव परे रहा है।
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