जगदलपुर । विश्व प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के अंतर्गत गुरुवार को जगदलपुर स्थित सिरहासार भवन में डेरी गड़ाई की पारंपरिक रस्म श्रद्धा, उल्लास और पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस रस्म को बस्तर दशहरा के विशाल मांगलिक मंडप के निर्माण और मंडप आच्छादन की आधारभूत परंपरा माना जाता है।
पुरातन लोक परंपरा के अनुसार नगर सीमा से लगे ग्राम बिलोरी से ग्रामीण दो विशेष काष्ठ स्तंभ लेकर सिरहासार भवन पहुंचे। स्थानीय संस्कृति और बोली में इन काष्ठ स्तंभों को ‘डेरी’ कहा जाता है। सिरहासार भवन परिसर में पारंपरिक पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार के बाद दोनों डेरी की विधिवत स्थापना की गई।
डेरी गड़ाई की रस्म पूरी होते ही परिसर में उत्सव का माहौल बन गया। परंपरा के अनुसार डेरी स्थापना के बाद मेम्बरीनों द्वारा हल्दी खेलने की रस्म निभाई गई। हल्दी उत्सव ने पूरे आयोजन को मांगलिक रंगों से सराबोर कर दिया और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
इस अवसर पर बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष एवं सांसद महेश कश्यप, समिति के उपाध्यक्ष बलराम मांझी, महापौर संजय पाण्डे, कमिश्नर डोमन सिंह, कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित प्रशासनिक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यक्रम में बस्तर के विभिन्न परगनों से पहुंचे मांझी-चालकी, नाइक-पाइक, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, गायता, सिरहा-गुनिया और पेरमा सहित बड़ी संख्या में पारंपरिक मुखिया एवं श्रद्धालु नागरिक शामिल हुए।
डेरी गड़ाई की रस्म के साथ ही बस्तर दशहरा की आगामी पारंपरिक रस्मों और मांगलिक आयोजनों का क्रम आगे बढ़ गया है। सदियों पुरानी लोक परंपराओं, देव-विधान और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ा बस्तर दशहरा एक बार फिर अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और परंपरागत स्वरूप के साथ आकार लेने लगा है।