समस्तीपुर | बिहार के जमुई जिले की घटना के बाद अब समस्तीपुर से एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। जमुई की घटना को अभी हफ्ता भी नहीं बीता था कि समस्तीपुर जिले के कर्पूरी ग्राम थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े एक नाबालिग लड़की के साथ उत्पीड़न का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
दिनदहाड़े हुईवानियत, वीडियो हुआ वायरल
आजतक से जुड़े जहांगीर आलम की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरी घटना 15 सितंबर की बताई जा रही है। कर्पूरी ग्राम थाना क्षेत्र के जगतसिंहपुर बांध के पास एक नाबालिग लड़का और लड़की अपनी बाइक रोककर आपस में बात कर रहे थे। तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और दोनों को घेर लिया।
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मारपीट और अभद्रता: आरोपियों ने पहले नाबालिग लड़के के साथ मारपीट की, जिसके बाद वह किसी तरह वहां से जान बचाकर भाग निकला।
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अश्लील हरकतें: अकेला पाकर आरोपियों ने नाबालिग लड़की को निशाना बनाया। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि आरोपी लड़की को बार-ба बार पकड़ रहे हैं, गालियां दे रहे हैं और भद्दी-अश्लील बातें कर रहे हैं।
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भाई बताने पर भी नहीं पसीजे: लड़की ने आरोपियों को बताया कि बाइक पर सवार युवक उसका भाई है, लेकिन इसके बावजूद दबंगई दिखाते हुए आरोपी उससे उसका पता पूछते रहे और प्रताड़ित करते रहे।
घटना के दौरान मौके पर मौजूद किसी शख्स ने इस पूरी करतूत का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और पुलिस तक जा पहुंचा।
पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई, 4 आरोपी गिरफ्तार
वीडियो सामने आते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया। समस्तीपुर के एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि वीडियो के आधार पर तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
सदर डीएसपी दुर्गेश दीपक ने जानकारी दी है कि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इस मामले में अब तक 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
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राहुल कुमार (उम्र 19 वर्ष)
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विकास शर्मा (उम्र 32 वर्ष)
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रामबाबू सहनी (उम्र 38 वर्ष)
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अवधेश पासवान (उम्र 46 वर्ष)
कानून-व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल
जमुई के बाद अब समस्तीपुर में हुई इस घटना ने एक बार फिर बिहार की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जमुई में जहां अंधेरे का फायदा उठाकर अपराध को अंजाम दिया गया था, वहीं समस्तीपुर में यह सब दिन के उजाले में खुलेआम हुआ।
बदलती जगहों और जिलों के बीच बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि सड़क पर सुरक्षित चल रही बेटियों की सुरक्षा के दावे जमीन पर कितने खोखले साबित हो रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की निगरानी पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।