संघर्ष से कक्षाओं तक: दंतेवाड़ा में आस्था गुरुकुल बच्चों को दे रहा नई राह

दंतेवाड़ा |  छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले का जवांगा लंबे समय तक हिंसा और वामपंथी उग्रवाद (LWE) के प्रभाव से जूझता रहा है। इसी क्षेत्र में स्थित एजुकेशन सिटी का आस्था विद्या मंदिर, जिसे आस्था गुरुकुल के नाम से भी जाना जाता है, संघर्ष प्रभावित बच्चों के लिए शिक्षा, आवास और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है।

कक्षा 1 से 12 तक संचालित इस आवासीय विद्यालय में वर्तमान में करीब 1,300 छात्र पढ़ रहे हैं। स्कूल ऐसे बच्चों को प्राथमिकता देता है, जो LWE से प्रभावित क्षेत्रों से आते हैं, हिंसा में अपने माता-पिता या परिवार के सदस्यों को खो चुके हैं या जिनके परिवार किसी न किसी रूप में संघर्ष से प्रभावित रहे हैं।

दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश

स्कूल के प्राचार्य रवींद्र पाणिग्राही के अनुसार, प्राथमिकता श्रेणी में दाखिले के लिए आधिकारिक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें पुलिस प्रमाण-पत्र, क्षेत्र के LWE गतिविधियों से प्रभावित होने की पुष्टि और परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु से संबंधित FIR जैसे दस्तावेज शामिल हो सकते हैं।

स्कूल का उद्देश्य केवल बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें एक स्थिर और सुरक्षित वातावरण देना भी है। हिंसा से प्रभावित छात्रों के लिए विशेषज्ञों की ओर से काउंसलिंग की व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा IAS अधिकारियों और अन्य विशेषज्ञों को छात्रों से संवाद और प्रेरक व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया जाता है।

स्मार्ट क्लासरूम और CBSE पाठ्यक्रम

आस्था गुरुकुल में CBSE पाठ्यक्रम के तहत पढ़ाई होती है। कक्षाओं में स्मार्ट-स्क्रीन जैसी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध हैं, ताकि दूरदराज के गांवों से आने वाले छात्रों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों तक पहुंच मिल सके।

पाणिग्राही के मुताबिक, एजुकेशन सिटी में स्कूल का संचालन NMDC के CSR वित्त-पोषण से समर्थित है, जबकि प्रशासन राज्य सरकार के पास है।

2013 में हुई थी शुरुआत

आस्था गुरुकुल की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी। इसके बुनियादी ढांचे के विकास में NMDC ने CSR के माध्यम से सहयोग दिया। परिसर में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग आवासीय भवनों के साथ 1,000 से अधिक लोगों की क्षमता वाला सभागार भी मौजूद है।

स्कूल के संचालन में भी CSR सहायता जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल का वार्षिक परिचालन खर्च करीब 3.5 करोड़ रुपये है। इस तरह संस्थान में राज्य सरकार के प्रशासन और कॉरपोरेट CSR सहयोग का एक मॉडल देखने को मिलता है।

शिक्षा के साथ पुनर्वास की कोशिश

संघर्ष प्रभावित क्षेत्र से आने वाले बच्चों के लिए आवासीय स्कूल का महत्व केवल कक्षा और पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है। परिसर उन्हें नियमित दिनचर्या, आवास, औपचारिक शिक्षा, परामर्श और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से संवाद का अवसर देता है।

एक दशक से अधिक समय में आस्था गुरुकुल ऐसे बच्चों के लिए शिक्षा के साथ-साथ पुनर्वास और भविष्य निर्माण का माध्यम बनने की कोशिश कर रहा है। यहां से निकलने वाले छात्रों के लिए सबसे बड़ी चुनौती और अवसर यह है कि वे अपने अतीत की परिस्थितियों से आगे बढ़कर अपनी शिक्षा और क्षमताओं के आधार पर भविष्य की दिशा तय कर सकें।

दंतेवाड़ा जैसे संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में किसी संस्थान की सफलता केवल उसके भवन या छात्रों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से भी मापी जा सकती है कि वहां से पढ़कर निकलने वाले बच्चे आगे किस तरह अपने जीवन और समुदाय के लिए नए अवसर तैयार करते हैं।

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