रायपुर | छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय सरकार और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी दिशा में हाल ही में दुर्ग और उत्तर बस्तर कांकेर जिले में विशेष मूल्यांकन एवं चिन्हांकन शिविरों का आयोजन किया गया, जहां दिव्यांगजनों को तमाम शासकीय योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर सहजता से उपलब्ध कराया गया।
दुर्ग और कांकेर में शिविरों का आयोजन
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दुर्ग जिला: जनपद पंचायत धमधा के अंबेडकर भवन में आयोजित शिविर में दिव्यांगजनों का स्वास्थ्य मूल्यांकन और चिन्हांकन किया गया। पात्र हितग्राहियों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए प्रक्रियाएं पूरी की गईं और उन्हें विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
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उत्तर बस्तर कांकेर: कोयलीबेड़ा, पखांजूर और बांदे जैसे दूरस्थ अंचलों से पहुंचे दिव्यांगजनों के लिए यह शिविर वरदान साबित हुआ। यहां एक ही छत के नीचे मेडिकल प्रमाण पत्र और UDID (यूडीआईडी) कार्ड बनाने की त्वरित कार्रवाई की गई। इसके अलावा, राशन कार्ड, बस पास और पेंशन योजनाओं से जुड़ी फाइलें भी मौके पर ही प्रोसेस की गईं।

सहायक उपकरणों का वितरण और आत्मनिर्भरता
शिविर के दौरान जरूरतमंद हितग्राहियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र (हियरिंग एड), ट्राइसाइकिल और बैटरी से चलने वाली मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल वितरित की गईं। इन आधुनिक और आवश्यक उपकरणों के मिलने से दिव्यांगजनों के दैनिक जीवन की राह आसान हुई है और वे आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। सुविधाएं मिलने के बाद स्थानीय नागरिकों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
एक ही स्थान पर मिल रही सभी सेवाएं
इन शिविरों की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि दिव्यांगजनों को अपने छोटे-छोटे कामों या प्रमाण पत्रों के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़े। मूल्यांकन से लेकर, प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड, पेंशन और सहायक उपकरणों तक की सारी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलने से उनका समय और पैसा दोनों बचा है, जो सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।