सऊदी अरब | यमन के लाल सागर (रेड सी) तट और बाब अल-मंडेब के पास हूती विद्रोहियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और कब्जों ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है। समुद्री रास्तों और तेल निर्यात पर मंडराते खतरे को देखते हुए सऊदी अरब ने चीन से मदद की गुहार लगाई है। इसके बाद हरकत में आए चीन ने ईरान से संपर्क साधा है और हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें काबू में करने को कहा है।
प्रमुख बिंदु
-
समुद्री रास्तों पर तनाव: बाब अल-मंडेब दुनिया के सबसे अहम समुद्री चोकपॉइंट्स में से एक है, जिससे होकर जहाज रेड सी और स्वेज नहर के रास्ते यूरोप तक पहुंचते हैं। हूतियों के बढ़ते प्रभाव से ग्लोबल सप्लाई चेन और तेल की सप्लाई खतरे में पड़ गई है।
-
सऊदी अरब की चिंताएं: हूतियों की बढ़ती मिलिट्री प्रेजेंस से सऊदी के तेल एक्सपोर्ट और समुद्री सुरक्षा पर बड़ा संकट मंडरा रहा है, जिसके चलते रियाद ने कूटनीतिक रूप से बीजिंग का रुख किया।
-
ईरान-चीन समीकरण: ईरान चीन का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर होने के साथ-साथ उसके कुल समुद्री तेल निर्यात का 80% से अधिक हिस्सा खरीदने वाला देश है। ऐसे में मिडिल ईस्ट का तनाव सीधे तौर पर चीन की एनर्जी सिक्योरिटी को प्रभावित कर सकता है।
-
चीन की मध्यस्थता की भूमिका: इससे पहले 2023 में चीन की मध्यस्थता से ही सऊदी अरब और ईरान के बीच कूटनीतिक रिश्ते बहाल हुए थे, लेकिन इस बार हूतियों के मामलों में ईरान को मनाना चीन के लिए भी एक पेचीदा चुनौती साबित हो रहा है।
“रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की अपील के बाद चीन ने ईरान से कहा है कि वह हूती विद्रोहियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे और उन्हें लाल सागर क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियां करने से रोके।”