हिंदुस्तान जिंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में जोड़े 3.2 करोड़ टन अयस्क संसाधन और भंडार, एक्सप्लोरेशन सफलता दर 88% से अधिक

उदयपुर |  दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक और वैश्विक स्तर पर शीर्ष दस चांदी उत्पादकों में शामिल हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अपने खोज एवं एक्सप्लोरेशन कार्यक्रम में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। कंपनी ने इस अवधि में 3.2 करोड़ टन (32 मिलियन टन) सकल अयस्क संसाधन एवं भंडार जोड़कर अपनी मजबूत तकनीकी क्षमताओं का परिचय दिया है।

रिकॉर्ड ड्रिलिंग और उच्च सफलता दर

कंपनी ने इस वित्त वर्ष में कुल 464.32 किलोमीटर से अधिक की ड्रिलिंग पूरी की, जिसमें से लगभग हर 10 में से 9 (यानी 88 प्रतिशत से अधिक) ड्रिल होल में खनिज (मिनरलाइजेशन) की प्राप्ति हुई। यह शानदार सफलता दर कंपनी की सटीक, उन्नत और प्रभावी एक्सप्लोरेशन रणनीति को दर्शाती है।

उत्पादन और भंडार में शानदार वृद्धि

यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब कंपनी ने उत्पादन के मोर्चे पर भी नया रिकॉर्ड बनाया है:

  • खनित धातु उत्पादन: वित्त वर्ष 2025-26 में हिंदुस्तान जिंक का कुल खनित धातु उत्पादन 11.14 लाख टन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।

  • अयस्क भंडार में बढ़ोतरी: रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद कंपनी के अयस्क भंडार में लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कुल भंडार बढ़कर 21.91 करोड़ टन (पिछले वर्ष 18.91 करोड़ टन) हो गया।

  • कुल संसाधन एवं भंडार: कंपनी के कुल संसाधन और भंडार बढ़कर 46.86 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे आगामी 25 वर्षों से अधिक की खदान आयु और भविष्य की विस्तार योजनाओं के लिए कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।

‘हिंदुस्तान जिंक 2.0’ और मल्टी-मेटल विजन

कंपनी के सीईओ श्री अमरेन्दु प्रकाश ने इस सफलता पर कहा, “किसी भी खनन कंपनी की दीर्घकालिक सफलता के लिए एक मजबूत संसाधन आधार बेहद जरूरी है। हम ‘हिंदुस्तान जिंक 2.0’ की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और एक्सप्लोरेशन के जरिए एक तरफ भंडार बढ़ा रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपनी परिसंपत्तियों की भविष्य की संभावनाओं को भी मजबूत कर रहे हैं।”

हिंदुस्तान जिंक अब केवल जिंक, सीसा (लेड) और चांदी तक सीमित न रहकर मल्टी-मेटल कंपनी के रूप में विकसित होने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत अयस्क भंडारों में मौजूद अन्य खनिजों का भी मूल्यांकन किया जा रहा है, जो भारत के विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) से जुड़े क्षेत्रों के लिए घरेलू उपलब्धता बढ़ाने में मददगार साबित होगा। कंपनी अपनी सहायक इकाई के जरिए नए खनिज क्षेत्रों में भी अन्वेषण गतिविधियों का विस्तार कर रही है।

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