दिल्ली | दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए PG हादसे ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के छात्रों की सुरक्षा और हॉस्टल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों में कुछ DU के छात्र भी थे, जो कॉलेज में हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण निजी PG में रह रहे थे।
91 कॉलेजों में सिर्फ 20 में हॉस्टल
दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुड़े कुल 91 कॉलेजों में करीब 20 कॉलेजों में ही हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध है। यानी 71 कॉलेजों के छात्रों के पास कॉलेज स्तर पर हॉस्टल का विकल्प नहीं है। DU के नॉर्थ और साउथ कैंपस में हॉस्टल मौजूद हैं, लेकिन कुल हॉस्टल क्षमता करीब 7,000 सीटों की बताई जाती है।
छात्रों की संख्या को देखते हुए यह क्षमता काफी कम है। खासकर दिल्ली से बाहर से आने वाले छात्रों को हॉस्टल नहीं मिलने पर निजी PG या किराए के कमरों में रहना पड़ता है।
कई कॉलेजों में हजारों छात्र, हॉस्टल सीटें बेहद कम
साउथ कैंपस के मैत्रेयी कॉलेज में करीब 4,000 से ज्यादा छात्राएं हैं, जबकि उसके हॉस्टल में सिर्फ 103 छात्रों के रहने की क्षमता बताई जाती है।
आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज में 5,000 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं, लेकिन कॉलेज में लड़कों या लड़कियों के लिए अपना हॉस्टल नहीं है। सत्य निकेतन हादसे में जान गंवाने वाले अर्पित और आदित्य भी इसी कॉलेज के छात्र बताए गए हैं।
वहीं श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में करीब 4,300 से ज्यादा छात्र हैं, जबकि लड़कों और लड़कियों के हॉस्टल मिलाकर कुल क्षमता लगभग 150 सीटों की है।
कुछ बड़े कॉलेजों में भी हाल खराब
मिरांडा हाउस में करीब 5,375 छात्र हैं, जबकि हॉस्टल में लगभग 370 छात्रों के रहने की क्षमता बताई जाती है। 2026-27 में फर्स्ट ईयर के छात्रों के लिए करीब 90 हॉस्टल सीटें उपलब्ध होने की बात सामने आई है।
किरोड़ी मल कॉलेज, हिंदू कॉलेज, SRCC, मिरांडा हाउस और लेडी श्री राम कॉलेज को मिलाकर करीब 24,350 छात्र हैं, जबकि इन कॉलेजों में कुल हॉस्टल क्षमता लगभग 1,140 सीटों की है। यानी कुल छात्रों के करीब 4.7 फीसदी को ही हॉस्टल मिल सकता है।
छात्रों की मजबूरी, निजी PG का सहारा
हॉस्टल की कमी के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को कैंपस के आसपास निजी PG या किराए के कमरों में रहना पड़ता है। छात्रों का कहना है कि कई कॉलेजों के पास जमीन होने के बावजूद पर्याप्त हॉस्टल नहीं बनाए गए हैं।
एक छात्र के मुताबिक, कॉलेज परिसर में खाली जमीन मौजूद है, जहां हॉस्टल बनाया जा सकता है। लेकिन हॉस्टल नहीं होने के कारण छात्रों को बाहर रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए यह स्थिति और मुश्किल हो जाती है।
VC का पुराना वीडियो भी चर्चा में
हादसे के बाद DU के वाइस चांसलर योगेश सिंह का एक पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसमें हॉस्टल से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा था कि सभी छात्रों को हॉस्टल देना न तो जरूरी है और न ही संभव, हालांकि नए हॉस्टल बनाने का काम चल रहा है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद DU प्रशासन ने सभी कॉलेजों से हॉस्टल की मौजूदा स्थिति की जानकारी मांगी है। कॉलेजों को छात्रों के लिए स्टे और PG से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
नए हॉस्टल बनाने की योजना
DU ने कॉलेजों के प्रिंसिपलों को नए हॉस्टल के निर्माण की संभावनाएं तलाशने के लिए कहा है। इसके तहत कॉलेजों को उपलब्ध जमीन की पहचान करने, निर्माण की लागत का आकलन करने और केंद्र व दिल्ली सरकार की योजनाओं से मिलने वाली संभावित आर्थिक मदद की जानकारी जुटाने को कहा गया है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने भी UGC से DU की हॉस्टल व्यवस्था को लेकर रिपोर्ट मांगी है। वहीं, हॉस्टल की सुविधा बढ़ाने का मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा है।
अब सवाल यही है कि हादसे के बाद हॉस्टल बढ़ाने की जो कवायद शुरू हुई है, वह सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या DU के छात्रों को वास्तव में सुरक्षित और पर्याप्त आवास की सुविधा मिलती है।