मद्रास हाईकोर्ट | मद्रास हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि अगर पत्नी बिना किसी ठोस वजह के बार-बार मायके चली जाती है और पति पर उसके माता-पिता से अलग रहने का दबाव बनाती है, तो परिस्थितियों के आधार पर इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है।
जस्टिस पी.टी. आशा और जस्टिस एन. माला की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पति को तलाक की मंजूरी दी गई थी। पत्नी ने फैमिली कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी।
पति ने लगाए थे ये आरोप
मामले के मुताबिक, पति का आरोप था कि उसकी पत्नी अक्सर ससुराल छोड़कर कई-कई महीनों के लिए मायके चली जाती थी। वह पति से अपने माता-पिता से अलग रहने की मांग करती थी।
पति अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। इसके बावजूद उसने पत्नी की इच्छा को देखते हुए अलग घर में रहने पर सहमति जताई। बताया गया कि बाद में वह पत्नी के मायके के पास भी घर लेकर रहने लगा। पति का आरोप था कि इसके बावजूद पत्नी बार-बार उसे छोड़कर मायके चली जाती थी।
इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की।
पत्नी ने लगाए दहेज प्रताड़ना के आरोप
वहीं पत्नी ने पति के आरोपों को खारिज किया। उसका कहना था कि उसे पति और ससुराल वालों की तरफ से दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था, जिसके कारण उसे घर छोड़ना पड़ा।
पत्नी ने पति पर किसी दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध होने का भी आरोप लगाया। उसका दावा था कि पति गुजारा-भत्ता देने से बचने और दूसरी शादी करने के लिए तलाक लेना चाहता था।
फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों के मौखिक और अन्य सबूतों पर विचार करने के बाद पति को तलाक की मंजूरी दे दी। इसके बाद पत्नी ने हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अपने 27 अगस्त के आदेश में कहा कि पत्नी ने यह जानते हुए शादी की थी कि उसका पति अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है और उनके बुढ़ापे में देखभाल की जिम्मेदारी उसकी है।
कोर्ट ने कहा कि इसके बावजूद बिना ठोस वजह पति पर माता-पिता से अलग रहने और अलग घर बसाने का दबाव बनाना परिस्थितियों के आधार पर क्रूरता माना जा सकता है।
कोर्ट ने यह भी पाया कि फैमिली कोर्ट की कार्यवाही के दौरान पत्नी को अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने के पर्याप्त मौके मिले थे। लेकिन वह न तो प्रभावी तरीके से जिरह में शामिल हुई और न ही अपने लगाए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश कर सकी।
‘शादी का रिश्ता एकतरफा नहीं चल सकता’
कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी का रिश्ता सिर्फ एक व्यक्ति की इच्छा के आधार पर नहीं चल सकता। वैवाहिक जीवन आपसी समझ, तालमेल और सम्मान पर टिका होता है।
अदालत ने यह भी माना कि बिना किसी ठोस कारण के बार-बार मायके चले जाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आ सकता है। ऐसी स्थिति में दूसरे साथी के भीतर असुरक्षा और लगातार तनाव की भावना पैदा हो सकती है।
हाईकोर्ट ने इन परिस्थितियों को देखते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी और फैमिली कोर्ट द्वारा पति को दी गई तलाक की मंजूरी को बरकरार रखा।