दिल्ली HC में गौरव भाटिया मानहानि केस: CJP नेता विवादित AI पोस्ट हटाएंगे, तीनों को समन

नई दिल्ली | भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित तौर पर AI से तैयार विवादित पोस्ट साझा करने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान CJP प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने विवादित पोस्ट हटाने पर सहमति जताई। CJP के वकील ने अदालत को भरोसा दिया कि दोनों पोस्ट 24 घंटे के भीतर डिलीट कर दी जाएंगी।

मामले में हाईकोर्ट ने सौरव दास, आशुतोष रांका और CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को समन जारी किया है। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Meta और X को भी निर्देश दिया कि यदि भविष्य में इन्हीं पोस्ट की हूबहू कॉपी दोबारा सामने आती है और गौरव भाटिया शिकायत करते हैं, तो उस पर कार्रवाई की जाए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, विवाद CJP कार्यकर्ता नीशू आजाद के पिता संजय कुमार पर कथित हमले के मामले से शुरू हुआ था। CJP की ओर से आरोप लगाया गया था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज और अन्य लोगों ने संजय कुमार के साथ मारपीट की।

इसी मामले को लेकर सौरव दास ने सोशल मीडिया पर एक ग्राफिक शेयर किया था। इसमें गौरव भाटिया की तस्वीर और नाम के साथ स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। भाटिया ने इस बयान से खुद को अलग बताते हुए पोस्ट को फर्जी करार दिया।

भाटिया ने मांगा 2 करोड़ रुपये का हर्जाना

गौरव भाटिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर करते हुए CJP नेताओं के खिलाफ 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी तस्वीर के साथ फर्जी बयान जोड़कर उसे इस तरह पेश किया गया, जैसे वह बयान उन्होंने खुद दिया हो।

भाटिया के मुताबिक, विवादित पोस्ट को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। उनकी याचिका में ऐसी पोस्ट को दोबारा साझा करने पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।

कोर्ट ने कहा- बिना जांचे पोस्ट करना ठीक नहीं

सुनवाई के दौरान जस्टिस तुषार राव गेडेला ने सौरव दास और आशुतोष रांका से पूछा कि क्या वे विवादित पोस्ट हटाने के लिए तैयार हैं। अदालत ने कहा कि विरोध करने और अपनी बात रखने के कई तरीके हैं, लेकिन बिना तथ्यों की जांच किए किसी व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की सामग्री साझा करना उचित नहीं है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन उसे जिम्मेदारी के साथ रखा जाना चाहिए। दोनों नेताओं की ओर से पोस्ट हटाने पर सहमति जताए जाने के बाद अदालत ने तत्काल पोस्ट हटाने का अलग आदेश जारी करने की जरूरत नहीं समझी।

सौरव दास ने बताया- AI से बना था ग्राफिक

सुनवाई के दौरान सौरव दास के वकील ने बताया कि संबंधित ट्वीट पहले ही डिलीट किया जा चुका है। अदालत ने एक अन्य पोस्ट का भी जिक्र किया, जिसके बाद दोनों नेताओं के वकीलों को उनसे निर्देश लेने को कहा गया।

बाद में सौरव दास और आशुतोष रांका ने भी पोस्ट हटाने पर सहमति जताई। दास ने बताया कि विवादित ग्राफिक AI की मदद से तैयार किया गया था। आरोप है कि आशुतोष रांका ने सौरव दास की पोस्ट को दोबारा शेयर किया था।

अभिजीत दीपके को समन पर कोर्ट ने उठाया सवाल

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को मामले में पक्षकार बनाए जाने को लेकर भी कोर्ट ने सवाल उठाया। अदालत ने पूछा कि दीपके के खिलाफ ऐसी कौन-सी पोस्ट या सामग्री सामने आई है, जिसके आधार पर उन्हें मामले में शामिल किया गया है।

दीपके के वकील ने कहा कि उनके खिलाफ कोई विवादित ट्वीट नहीं है। अदालत ने भी माना कि पहली नजर में दीपके की ओर से ऐसी कोई पोस्ट सामने नहीं आई है। इसके बावजूद मामले में उन्हें समन जारी किया गया है।

फिलहाल CJP नेताओं की ओर से विवादित पोस्ट हटाने पर सहमति जताए जाने के बाद मामले की आगे की सुनवाई जारी रहेगी।

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