एनएमडीसी की पहल से बस्तर की 18 आदिवासी बेटियों को मिली नई उड़ान, नर्सिंग की पढ़ाई के लिए चेन्नई रवाना

बचेली। बस्तर अंचल की आदिवासी बेटियों को शिक्षा के जरिए सशक्त बनाने की दिशा में एनएमडीसी, बचेली की ‘बालिका शिक्षा योजना’ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के तहत चयनित 18 छात्राओं का पहला बैच जीएनएम नर्सिंग कोर्स में प्रवेश के लिए चेन्नई रवाना हुआ।

एनएमडीसी, बचेली के सीएसआर विभाग की चयन प्रक्रिया के जरिए इन छात्राओं का चयन किया गया है। सभी छात्राएं एसआरएम कॉलेज ऑफ नर्सिंग, चेन्नई में नर्सिंग की पढ़ाई करेंगी। इससे उन्हें बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर हासिल करने का रास्ता मिलेगा।

मंगल भवन में हुआ अधिष्ठापन कार्यक्रम

छात्राओं के चेन्नई रवाना होने से पहले 5 सितंबर 2026 को बचेली के मंगल भवन में विशेष अधिष्ठापन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में एनएमडीसी, बचेली के परियोजना प्रमुख श्रीधर कोडाली, मुख्य महाप्रबंधक टी. शिव कुमार, मुख्य महाप्रबंधक (उत्पादन) महेश एस. नायर, महाप्रबंधक (मा.सं.) अरविन्द पांडे, सीएमओ एमएमडीसी अपोलो हॉस्पिटल जोसी थॉमस सहित अन्य अधिकारी, सीएसआर कर्मचारी और छात्राओं के अभिभावक मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान एनएमडीसी अधिकारियों ने छात्राओं का उत्साहवर्धन किया और उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि ने बस को हरी झंडी दिखाकर छात्राओं को चेन्नई के लिए रवाना किया।

छह जिलों की छात्राओं का हुआ चयन

एनएमडीसी सीएसआर विभाग, बचेली ने पिछले महीने छह जिलों की आदिवासी छात्राओं के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की थी। इसी परीक्षा के आधार पर योग्य छात्राओं का चयन प्रतिष्ठित नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए किया गया।

चयनित छात्राओं की कॉलेज फीस, आवास, भोजन समेत संपूर्ण शैक्षणिक खर्च एनएमडीसी प्रबंधन द्वारा वहन किया जाएगा। इससे छात्राओं और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

पढ़ाई पूरी कर बस्तर में करेंगी सेवा

एनएमडीसी की इस पहल का उद्देश्य केवल बेटियों को उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि बस्तर क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत करना है। योजना के तहत शिक्षा हासिल करने वाली ये छात्राएं भविष्य में नर्स बनकर वापस बस्तर लौटेंगी और अपने समाज एवं क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देंगी।

‘बालिका शिक्षा योजना’ को आदिवासी बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने और बस्तर में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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