इन समझौतों में ड्रोन, समुद्री सुरक्षा, माइन्स हटाने की तकनीक, रडार, गोला-बारूद और अन्य रक्षा प्रणालियों से जुड़े सहयोग शामिल हैं। दोनों देशों की कंपनियां भारत में मिलकर तकनीक विकसित करने और रक्षा उपकरणों का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ेंगी।
15 रक्षा कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल भी भारत पहुंचा
बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ करीब 15 रक्षा कंपनियों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। प्रस्तावित सहयोग में जोरावर टैंक की 3105 टरेट, 70 एमएम रॉकेट, समुद्री माइन्स हटाने की तकनीक और बड़े पैमाने पर गोला-बारूद उत्पादन जैसी योजनाएं शामिल हैं।
इस सहयोग से भारत की घरेलू रक्षा निर्माण क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच मौजूदा करीब 13 अरब डॉलर के व्यापार को भी रक्षा और अन्य क्षेत्रों में विस्तार देने पर चर्चा हुई।
पाकिस्तान को लेकर भारत ने साफ कर दिया अपना रुख
प्रधानमंत्री स्तर की बैठक से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकेन के बीच भी अहम बातचीत हुई। इस दौरान राजनाथ सिंह ने बेल्जियम से स्पष्ट कहा कि रक्षा क्षेत्र से जुड़ी संवेदनशील तकनीक पाकिस्तान को हस्तांतरित नहीं होनी चाहिए।
भारत-बेल्जियम के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए घरेलू उत्पादन और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों पर जोर दे रहा है।