जांजगीर । शासकीय टीसीएल स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जांजगीर में ‘भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ का भावपूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वर्ष 1947 में भारत विभाजन के दौरान विस्थापन, हिंसा और पीड़ा झेलने वाले लाखों लोगों को श्रद्धांजलि देना तथा युवा पीढ़ी को विभाजन के मानवीय पक्षों से अवगत कराना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. डी. आर. लहरे ने की। इस अवसर पर प्राध्यापकों, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवकों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। विद्यार्थियों ने विभाजन से प्रभावित परिवारों के संघर्ष और बलिदान को स्मरण करते हुए इतिहास के इस त्रासद अध्याय से सीख लेने का संदेश दिया।
सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने पर जोर
वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एम. एल. पाटले ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विभाजन जैसी ऐतिहासिक त्रासदी को याद करने का उद्देश्य किसी प्रकार का विद्वेष पैदा करना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर समाज में आपसी भाईचारा, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को और मजबूत करना है।
उन्होंने विद्यार्थियों से देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने तथा सामाजिक सौहार्द की भावना को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
देश की अखंडता बनाए रखने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को भारत विभाजन से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं और उसके सामाजिक एवं मानवीय प्रभावों की जानकारी दी गई। आयोजन का समापन देश की संप्रभुता, अखंडता, सामाजिक सौहार्द और परस्पर प्रेम की भावना को बनाए रखने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. पी. के. सिंह, कार्यक्रम अधिकारी आर. के. चंद्रा एवं डॉ. पुष्पा सिंह सहित महाविद्यालय के शिक्षकगण, NSS स्वयंसेवक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।