नई दिल्ली |‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों वाले खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के आदेश पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
यह अंतरिम राहत डाबर इंडिया की उस याचिका पर दी गई, जिसमें कंपनी ने FSSAI के 3 अगस्त के आदेश को चुनौती दी थी।
क्या है मामला?
FSSAI ने डाबर इंडिया को निर्देश दिया था कि वह ‘100%’ जैसे दावों के साथ बेचे जा रहे कई खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल रोक दे। प्राधिकरण का कहना था कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं।
इस आदेश के दायरे में डाबर हनी, डाबर सुंदरबन हनी, डाबर हनी स्क्वीजी, हिमालयन एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल, काऊ घी, रियल एक्टिव 100% टेंडर कोकोनट वॉटर, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क और डाबर ऑर्गेनिक हनी जैसे उत्पाद शामिल हैं।
डाबर का पक्ष
कंपनी ने अदालत में कहा कि FSSAI ने बिना कारण बताओ नोटिस या सुधार का अवसर दिए सीधे बिक्री रोकने का आदेश जारी कर दिया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
डाबर का तर्क है कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशंस, 2018 के तहत किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।
कंपनी ने यह भी कहा कि आदेश के कारण बाजार में मौजूद उत्पादों को वापस मंगाने या उनकी री-पैकेजिंग जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिससे व्यावसायिक नुकसान हुआ।
कानूनी आधार पर भी उठाए सवाल
डाबर ने अदालत में यह भी दलील दी कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 18 केवल मार्गदर्शक सिद्धांत तय करती है और इसके आधार पर बिक्री पर रोक लगाने का स्वतंत्र अधिकार नहीं बनता।
कंपनी का कहना है कि FSSAI ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ‘100% प्योर’ या ‘100% नेचुरल’ जैसे दावे किस प्रकार नियमों का उल्लंघन करते हैं। साथ ही, प्राधिकरण ने उत्पादों की गुणवत्ता, मिलावट, असुरक्षा या नकली होने का कोई आरोप भी नहीं लगाया है। विवाद केवल लेबलिंग और विज्ञापन से जुड़ा है।
हाई कोर्ट की अंतरिम राहत
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अमित महाजन ने FSSAI के 3 अगस्त के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया और जवाब दाखिल करने को कहा।
अब मामले की आगे की सुनवाई में अदालत दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी। फिलहाल, यह अंतरिम आदेश है और अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।