रामलला दर्शन योजना: सरगुजा के 850 श्रद्धालु भारत गौरव ट्रेन से अयोध्या-काशी रवाना

रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की रामलला दर्शन योजना के तहत सरगुजा संभाग के 850 श्रद्धालु भारत गौरव ट्रेन से श्री अयोध्या धाम और श्री काशी विश्वनाथ धाम के दर्शन के लिए रवाना हुए। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल की पहल पर संचालित इस योजना के माध्यम से बुजुर्गों, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निःशुल्क धार्मिक यात्रा का अवसर मिल रहा है।

अंबिकापुर रेलवे स्टेशन से श्रद्धालुओं को लेकर रवाना हुई भारत गौरव ट्रेन को जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर विदा किया। स्टेशन परिसर में “जय श्रीराम”, “हर-हर महादेव” और “जय सियाराम” के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। परिजनों ने तिलक लगाकर और पुष्पवर्षा कर यात्रियों को शुभकामनाओं के साथ विदा किया।

यात्रा में सभी सुविधाएं उपलब्ध

पर्यटन विभाग और आईआरसीटीसी के समन्वय से संचालित इस यात्रा में श्रद्धालुओं के लिए आरामदायक रेल यात्रा, सुरक्षित आवास, शुद्ध शाकाहारी भोजन, पेयजल, स्थानीय परिवहन, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा व्यवस्था और एस्कॉर्ट दल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष सहायता की भी व्यवस्था की गई है।

आस्था से जुड़ी जनकल्याणकारी पहल

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि रामलला दर्शन योजना मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील नेतृत्व की महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी पहल है। यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का अभियान है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करने तथा यात्रा से लौटकर अपने अनुभव साझा कर अन्य लोगों को भी इस योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित करने की अपील की।

श्रद्धालुओं ने जताया आभार

यात्रा पर रवाना हुए कई बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने भावुक होकर कहा कि आर्थिक कारणों से जीवनभर अयोध्या और काशी के दर्शन नहीं कर सके थे, लेकिन राज्य सरकार की इस योजना ने उनका वर्षों पुराना सपना पूरा कर दिया। महिला श्रद्धालुओं ने भी यात्रा की बेहतर व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

राज्य सरकार का कहना है कि रामलला दर्शन योजना का उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों के दर्शन कराना नहीं, बल्कि प्रदेशवासियों को उनकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ना भी है। योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को निःशुल्क तीर्थ यात्रा का लाभ मिल रहा है।

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