खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ स्थित एशिया के पहले संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ने अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता और भारतीय कला-संस्कृति के संरक्षण के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनाई है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने के लिए 23 देशों के 253 विदेशी छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया है।
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की स्वीकृति के बाद अब तक 17 विदेशी विद्यार्थियों को प्रवेश मिल चुका है। प्रवेश प्रक्रिया अभी जारी है और आवेदन की अंतिम तिथि 14 अगस्त निर्धारित है। ऐसे में इस वर्ष विदेशी विद्यार्थियों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।
विदेशी विद्यार्थियों ने बांग्लादेश, श्रीलंका, अंगोला, ब्राजील, कनाडा, इंडोनेशिया, ईरान, अमेरिका, रूस, नेपाल, मॉरीशस सहित 23 देशों से आवेदन किए हैं। इनमें सबसे अधिक 187 आवेदन बांग्लादेश से प्राप्त हुए हैं।
संगीत, नृत्य और ललित कला में बढ़ी रुचि
विदेशी विद्यार्थियों का सबसे अधिक आकर्षण भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोकसंगीत, कत्थक, भरतनाट्यम, थियेटर, पेंटिंग और ग्राफिक्स जैसे विषयों की ओर है। अब तक प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों ने लोकसंगीत, ग्राफिक्स, पेंटिंग, थियेटर, कत्थक, भरतनाट्यम और तबला जैसे विषयों का चयन किया है।
विश्वविद्यालय की गुरु-शिष्य परंपरा, अनुभवी शिक्षकों की उपलब्धता, शांत शैक्षणिक वातावरण और कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा विदेशी विद्यार्थियों को खैरागढ़ की ओर आकर्षित कर रही है। विश्वविद्यालय में उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय छात्रावास सुविधा भी विदेशी छात्रों के लिए बड़ा आकर्षण बनी हुई है।
पिछले साल भी बढ़ा था विदेशी छात्रों का रुझान
पिछले शैक्षणिक सत्र में विश्वविद्यालय को 232 विदेशी आवेदन मिले थे, जिनमें से 22 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया था। इस बार आवेदन संख्या बढ़कर 253 पहुंच गई है, जो विश्वविद्यालय की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता को दर्शाता है।
विदेशी विद्यार्थी यहां केवल स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में ही नहीं, बल्कि शोध कार्यों के लिए भी प्रवेश लेते हैं। इससे पहले अफगानिस्तान समेत कई देशों के शोधार्थी विश्वविद्यालय से जुड़ चुके हैं।
भारतीय संस्कृति को विश्व मंच पर पहुंचाने का प्रयास
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि विदेशी विद्यार्थियों का बढ़ता रुझान विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और भारतीय कला-संस्कृति के प्रति दुनिया की बढ़ती रुचि का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ शोध के अवसरों को भी बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
खैरागढ़ का यह संगीत विश्वविद्यालय अब छोटे शहर से निकलकर भारतीय कला और संस्कृति के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।