नई दिल्ली | दिल्ली सरकार ने विकासपुरी स्थित एक निजी स्कूल के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं के मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शिक्षा निदेशालय (DoE) के औचक निरीक्षण में छात्रों की सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन से जुड़े कई गंभीर मामले सामने आए हैं।
जांच में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि स्कूल बिना वैध अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाणपत्र (फायर NOC) के 43 अतिरिक्त कक्षाओं का संचालन कर रहा था। शिक्षा विभाग ने इसे छात्रों की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही करार दिया है।
निरीक्षण में सामने आईं कई गंभीर अनियमितताएं
शिक्षा निदेशालय की जांच में पाया गया कि स्कूल के पास केवल 39 कमरों के लिए फायर NOC थी, जबकि परिसर में 82 कमरों का संचालन किया जा रहा था। इसके अलावा बिना अनुमति 30 कमरों का टिन-शेड, अवैध बेसमेंट और तीसरी मंजिल का निर्माण भी किया गया था।
निरीक्षण के दौरान कुछ कक्षाओं में केवल एक निकास द्वार मिला, जबकि आपातकालीन निकासी मार्ग और अग्निशमन वाहनों के प्रवेश मार्ग भी अवरुद्ध पाए गए।
भूजल दोहन, फीस वृद्धि और मान्यता संबंधी गड़बड़ियां
जांच में यह भी सामने आया कि स्कूल बिना वैधानिक अनुमति के बोरवेल के जरिए भूजल का दोहन कर रहा था। इसके अलावा वरिष्ठ माध्यमिक स्तर की अस्थायी मान्यता वर्ष 2023 में समाप्त होने के बावजूद पिछले तीन वर्षों से कक्षाओं का संचालन जारी रखा गया।
शिक्षा विभाग के अनुसार, स्कूल ने बिना अनुमति कई बार फीस बढ़ाई। कोविड-19 के दौरान भी 20 से 25 प्रतिशत तक शुल्क वृद्धि की गई और ‘स्मार्ट क्लासरूम शुल्क’ भी मनमाने ढंग से बढ़ाकर अभिभावकों से अतिरिक्त राशि वसूली गई।
शिक्षकों को समय पर नहीं मिला वेतन
निरीक्षण रिपोर्ट में शिक्षकों के शोषण का मामला भी सामने आया। पर्याप्त वित्तीय संसाधन होने के बावजूद कई शिक्षकों को सरकारी वेतनमान के अनुरूप वेतन नहीं दिया गया और कई मामलों में चार-चार महीने तक वेतन लंबित रखा गया।
इसके अलावा स्कूल प्रबंधन समिति में एक ही परिवार के सदस्यों का वर्चस्व और आवश्यक प्रशासनिक दस्तावेजों का सत्यापन के समय उपलब्ध नहीं कराया जाना भी जांच में दर्ज किया गया।
शिक्षा मंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मामले को गंभीर बताते हुए शिक्षा निदेशालय को स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार ने स्कूल प्रबंधन को सात दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है।
सरकारी अधिग्रहण तक हो सकती है कार्रवाई
शिक्षा निदेशालय ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 के तहत स्कूल का सरकारी अधिग्रहण किया जा सकता है।
इसके साथ ही सार्वजनिक भूमि के दुरुपयोग के आरोपों को देखते हुए स्कूल की लीज रद्द करने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को भी अनुशंसा भेजी जा सकती है।