नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी को लेकर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग को शिक्षकों को चुनाव संबंधी कार्यों में नियुक्त करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस वजह से शिक्षकों पर असहनीय मानसिक और शारीरिक दबाव न पड़े।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान में बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) और गणना कर्मी के रूप में तैनात किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि यदि कोई शिक्षक रोजाना 6 से 8 घंटे तक स्कूल में पढ़ाने के बाद चुनावी कार्य भी करता है, तो उस पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ सकता है। अदालत ने कहा कि शिक्षकों की शैक्षणिक जिम्मेदारियों और चुनावी कार्यों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
11 घंटे काम लेने पर कोर्ट ने जताई चिंता
सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से बताया गया कि शिक्षकों से स्कूल समय के दौरान चुनावी कार्य नहीं कराया जा रहा है। उन्हें स्कूल की छुट्टी के बाद BLO का काम सौंपा जाता है और शिक्षण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए स्वयंसेवकों की भी मदद ली जा रही है।
इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि यदि शिक्षक स्कूल में 6 से 8 घंटे पढ़ाने के बाद करीब 5 घंटे चुनावी कार्य करते हैं, तो कुल मिलाकर 11 घंटे काम करना पड़ सकता है, जो उचित नहीं है।
पीठ ने विशेष रूप से महिला शिक्षकों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि कई शिक्षकों की पारिवारिक जिम्मेदारियां भी होती हैं, जिन्हें ध्यान में रखना आवश्यक है।
आयोग को दिए निर्देश
हाई कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि चुनावी कार्यों के लिए शिक्षकों की तैनाती करते समय यह ध्यान रखा जाए कि उन पर इतना अधिक बोझ न पड़े कि उनकी सेहत, कार्यक्षमता और नियमित शिक्षण कार्य प्रभावित हो।
अदालत ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके लिए शिक्षकों के स्वास्थ्य और शैक्षणिक दायित्वों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि शिक्षकों को अलग-अलग स्तरों से अलग-अलग निर्देश दिए जा रहे हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बन रही है। अदालत ने याचिकाकर्ता से निर्वाचन आयोग के दावों के विरोध में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा है।