नई दिल्ली। सीजेपी छात्र आंदोलन हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और एफआईआर पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने केंद्र सरकार और सात राज्यों को नोटिस जारी करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वालों और कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन छात्रों पर पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल, इलेक्ट्रिक बैटन के प्रयोग, प्रदर्शनकारियों के गंभीर रूप से घायल होने, वकीलों और मीडिया कर्मियों पर कथित हमलों जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।
सीजेआई ने जताई जांच और जवाबदेही की जरूरत
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि मामले की जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शुरुआत में आंदोलन शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में हिंसा हुई। इसके पीछे दो संभावनाएं हो सकती हैं—या तो पुलिस ने जरूरत से ज्यादा सख्ती की या फिर प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ ऐसे लोग शामिल हो गए जिन्होंने हिंसा भड़काई।
सीजेआई ने कहा कि एक स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार होने के बाद जवाबदेही तय करना आसान होगा।
याचिकाकर्ताओं ने रखी स्वतंत्र जांच की मांग
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में कहा कि पुलिस हिंसा करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है, लेकिन जहां तक संभव हो बल प्रयोग से बचना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मी बिना वर्दी के मौजूद थे और हथियारों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने पूर्व मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में SIT गठित करने की मांग भी रखी।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की कि प्रदर्शनकारियों की डिजिटल पहचान कर उसे सार्वजनिक करने पर रोक लगाई जाए, क्योंकि इसमें छात्र और नाबालिग भी शामिल हो सकते हैं।
कई राज्यों में घटनाओं का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि मामला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश, नागपुर और बिहार सहित अन्य स्थानों पर भी इसी तरह की घटनाएं सामने आई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी याचिकाओं में कुछ समान आरोप दिखाई दे रहे हैं, जिनकी जांच आवश्यक है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 अगस्त की तारीख तय की है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब जांच प्रक्रिया और SIT गठन को लेकर केंद्र एवं संबंधित राज्यों की कार्रवाई पर नजर रहेगी।