हड़प्पा से नौसेना तक की यात्रा दिखाएगा लोथल का समुद्री संग्रहालय, 14 दीर्घाओं में सजेगी भारत की विरासत

लोथल  । भारत की करीब 4,500 वर्ष पुरानी समुद्री विरासत, हड़प्पा सभ्यता की उन्नत नगर व्यवस्था और प्राचीन समुद्री व्यापार की गौरवशाली परंपरा अब आधुनिक तकनीक और अनुभवात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से दुनिया के सामने आने जा रही है। गुजरात के ऐतिहासिक लोथल में विकसित हो रहा राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (National Maritime Heritage Complex–NMHC) भारत के सबसे बड़े समुद्री विरासत एवं पर्यटन केंद्रों में से एक के रूप में आकार ले रहा है।

पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित मीडिया अध्ययन दौरे के तहत छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान पत्रकारों ने निर्माणाधीन संग्रहालय, प्रस्तावित दीर्घाओं और परिसर की विभिन्न थीम आधारित सुविधाओं की जानकारी ली।

नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज म्यूजियम, लोथल के महाप्रबंधक अमित राठौड़ ने बताया कि यह परिसर केवल एक संग्रहालय नहीं, बल्कि भारत की समुद्री यात्रा को प्राचीन काल से आधुनिक युग तक अनुभवात्मक तरीके से प्रस्तुत करने वाला एक व्यापक विरासत केंद्र होगा।

उन्होंने बताया कि करीब 400 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इस परिसर में समुद्री संग्रहालय के अलावा हड़प्पाई नगर का पुनर्निर्माण, तटीय राज्यों के पवेलियन, जेट्टी, जलमार्ग, थीम पार्क, समुद्री एवं नौसैनिक विरासत से जुड़े आकर्षण और पर्यटकों के लिए आवासीय सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

14 दीर्घाओं में दिखाई जाएगी भारत की समुद्री यात्रा

राष्ट्रीय समुद्री विरासत संग्रहालय में भारत की समुद्री यात्रा के अलग-अलग कालखंडों को दर्शाने वाली 14 विषयगत दीर्घाएं विकसित की जा रही हैं।

इनमें हड़प्पा सभ्यता के समुद्री संबंध, प्राचीन भारत की समुद्री परंपरा, यूनानी-रोमन देशों से व्यापारिक संबंध, यूरोपीय शक्तियों का आगमन, गुजरात की समुद्री विरासत, मराठा नौसैनिक शक्ति, भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के विकास सहित कई महत्वपूर्ण विषयों को प्रदर्शित किया जाएगा।

इसके अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध, जलवायु परिवर्तन, पारंपरिक जहाज निर्माण तकनीक, स्वतंत्रता के बाद भारतीय नौवहन और बच्चों के लिए विशेष दीर्घा भी आकर्षण का केंद्र होगी।

हड़प्पाई नगर का होगा जीवन आकार पुनर्निर्माण

परिसर में प्राचीन लोथल की जीवनशैली को दर्शाने के लिए एक लाइफ-साइज हड़प्पाई नगर का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। लगभग 80×80 मीटर क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इस नगर में प्राचीन सड़क व्यवस्था, आवास, बाजार और जल निकासी प्रणाली को प्रदर्शित किया जाएगा।

अमित राठौड़ ने बताया कि इसका उद्देश्य पर्यटकों को 4,500 वर्ष पुराने सुव्यवस्थित नगर जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव कराना है। यहां हड़प्पाई शैली से प्रेरित बाजार भी विकसित किया जाएगा, जहां पर्यटकों के लिए खान-पान और स्मृति चिह्नों की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

जेट्टी, जलमार्ग और लाइटहाउस होंगे प्रमुख आकर्षण

राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर में जेट्टी और जलमार्ग को भी विशेष रूप से विकसित किया जा रहा है। पर्यटक परिसर के विभिन्न हिस्सों से जलमार्ग के माध्यम से संग्रहालय तक पहुंच सकेंगे।

इसके अलावा लाइटहाउस म्यूजियम, 5-डी डोम थिएटर, ‘लोथल नी-वाव’, साउंड एंड लाइट शो, समुद्री थीम आधारित इको-रिसॉर्ट और म्यूजोटेल जैसी सुविधाएं भी विकसित करने की योजना है।

तटीय राज्यों की विरासत को मिलेगा मंच

परिसर में देश के विभिन्न तटीय राज्यों की समुद्री और सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित करने के लिए कोस्टल पवेलियन बनाए जा रहे हैं। गुजरात और महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों की समुद्री विरासत को एक ही स्थान पर प्रस्तुत किया जाएगा।

इसके साथ ही मैरीटाइम एंड नेवल पार्क, मॉन्यूमेंट्स थीम पार्क, क्लाइमेट चेंज थीम पार्क और एडवेंचर एंड एम्यूजमेंट पार्क जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

35 देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की योजना

भारत की समुद्री विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए करीब 35 देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की योजना बनाई गई है। इनमें पुर्तगाल, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम, थाईलैंड, नीदरलैंड, डेनमार्क, जर्मनी, ओमान और इजराइल सहित कई देशों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।

इस सहयोग के माध्यम से विभिन्न देशों की समुद्री परंपराओं, इतिहास और ज्ञान का आदान-प्रदान किया जाएगा।

लोथल को बनाया जाएगा बड़ा पर्यटन केंद्र

राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के साथ पूरे लोथल क्षेत्र के विकास की भी योजना तैयार की जा रही है। गुजरात सरकार ने इसके लिए लोथल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (LADA) का गठन किया है और क्षेत्र के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।

लोथल को गुजरात के प्रमुख पर्यटन स्थलों से जोड़ने के लिए इको-टूरिज्म और हेरिटेज टूरिज्म सर्किट विकसित किए जाने की योजना है। इसमें अहमदाबाद, नलसरोवर वेटलैंड, थोल बर्ड सेंचुरी, रानी की वाव, मोढेरा सूर्य मंदिर और ब्लैकबक नेशनल पार्क जैसे पर्यटन स्थलों को जोड़ा जाएगा।

‘विकास भी, विरासत भी’ की अवधारणा को साकार करेगा परिसर

अमित राठौड़ ने बताया कि राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर भारत की प्राचीन समुद्री उपलब्धियों और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक, पर्यटन और शिक्षा से जोड़ने का प्रयास है।

परियोजना के पूर्ण होने के बाद लोथल वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख समुद्री विरासत केंद्र के रूप में स्थापित हो सकता है। यह परिसर भारत की 4,500 वर्ष पुरानी समुद्री परंपरा, हड़प्पाई नगर नियोजन, जल प्रबंधन और आधुनिक समुद्री क्षेत्र की यात्रा को एक साथ प्रस्तुत करेगा।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *