नई दिल्ली | दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा ने पुलिस व्यवस्था में सुधार और आपराधिक मामलों की जांच को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब कानून-व्यवस्था (लॉ एंड ऑर्डर) और आपराधिक मामलों की जांच (इन्वेस्टिगेशन) से जुड़े कार्यों को अलग-अलग किया जाएगा।
इस संबंध में सभी जिला इकाइयों को निर्देश जारी किए गए हैं। पुलिस कमिश्नर ने समीक्षा बैठक के दौरान सभी जिला पुलिस उपायुक्तों (DCP) को पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रत्येक जिले से एक-एक थाना चयनित कर नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं।
नई व्यवस्था के तहत जांच अधिकारी केवल आपराधिक मामलों की जांच पर ध्यान देंगे, जबकि अलग टीमें कानून-व्यवस्था, वीआईपी ड्यूटी, रैलियों, त्योहारों और अन्य सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां संभालेंगी। इससे जांच अधिकारियों पर अतिरिक्त कार्यभार कम होगा और वे मामलों की समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण जांच कर सकेंगे।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, जिला जांच इकाइयों (District Investigation Units-DIU) को और मजबूत किया जाएगा ताकि जटिल और तकनीकी मामलों की जांच अधिक पेशेवर तरीके से हो सके। पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों का मूल्यांकन करने के बाद इसकी रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर इसे अन्य थानों में भी लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा।
संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा ने कहा कि बदलते समय में अपराधों का स्वरूप लगातार जटिल होता जा रहा है। वित्तीय धोखाधड़ी, संगठित अपराध और साइबर अपराध जैसे मामलों की जांच के लिए विशेष कौशल और विशेषज्ञता की आवश्यकता है। ऐसे मामलों में प्रशिक्षित जांच अधिकारियों को केवल जांच कार्य पर केंद्रित रखना जरूरी है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि नई व्यवस्था से साक्ष्य जुटाने, गवाहों के बयान दर्ज करने और समय पर चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया में सुधार होगा। इससे अदालतों में दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) बढ़ने के साथ-साथ आम जनता का पुलिस व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत होगा।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि जांच और कानून-व्यवस्था को अलग करने से पुलिसिंग अधिक पेशेवर, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी तथा पीड़ितों को भी समयबद्ध न्याय दिलाने में मदद मिलेगी।