तिरुवनंतपुरम। केरल सरकार की वार्षिक वाइटल स्टैटिस्टिक्स रिपोर्ट-2024 में राज्य की जनसंख्या वृद्धि को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू और ईसाई समुदाय में प्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि (Natural Population Growth) नकारात्मक हो गई है, जबकि मुस्लिम समुदाय में अभी भी जन्मों की संख्या मौतों से अधिक बनी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में केरल में कुल 3,44,766 जीवित जन्म दर्ज किए गए। इनमें 46.14 प्रतिशत मुस्लिम, 39.49 प्रतिशत हिंदू और 14.06 प्रतिशत ईसाई समुदाय से थे। वहीं, इसी अवधि में दर्ज कुल मौतों में 59.66 प्रतिशत हिंदू, 20.15 प्रतिशत ईसाई और 19.92 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय के लोगों की थीं।
क्या है नेगेटिव नेचुरल ग्रोथ?
जब किसी समुदाय में एक वर्ष के दौरान मौतों की संख्या जन्मों से अधिक हो जाती है, तो उसे नेगेटिव नेचुरल ग्रोथ रेट (NGR) कहा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू समुदाय पहली बार 2022 में इस स्थिति में पहुंचा था और 2023 में इसका NGR घटकर -0.115 प्रतिशत हो गया। वहीं, ईसाई समुदाय का NGR भी -0.084 प्रतिशत दर्ज किया गया।
मुस्लिम समुदाय में अभी भी सकारात्मक वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम समुदाय में जन्मों की संख्या अब भी मौतों से अधिक है, जिससे राज्य की कुल प्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि सकारात्मक बनी हुई है। हालांकि, इस समुदाय में भी जन्म दर और प्रजनन दर (फर्टिलिटी रेट) में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
जन्म और मृत्यु के आंकड़े
हिंदू समुदाय में जन्मों की संख्या वर्ष 2020 के 1,85,411 से घटकर 2024 में 1,36,163 रह गई। मुस्लिम समुदाय में यह संख्या 1,96,138 से घटकर 1,59,088 और ईसाई समुदाय में 62,265 से घटकर 48,476 हो गई।
वहीं, राज्य में कुल मौतों की संख्या लगातार बढ़ी है। हिंदू समुदाय में 2024 में 1,87,079, मुस्लिम समुदाय में 62,471 और ईसाई समुदाय में 63,172 मौतें दर्ज की गईं।
अगले दो दशकों में पूरी तरह नेगेटिव ग्रोथ की आशंका
जनसांख्यिकी विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहा तो अगले दो दशकों में पूरा केरल राज्य नेगेटिव नेचुरल ग्रोथ रेट वाले राज्यों की श्रेणी में पहुंच सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में कुल जन्मों में 50.78 प्रतिशत लड़के और 49.22 प्रतिशत लड़कियां थीं। राज्य का लिंगानुपात (Sex Ratio) 2023 के 966 से बढ़कर 2024 में 969 हो गया। सबसे अधिक जन्म दर मलप्पुरम जिले में और सबसे कम अलप्पुझा जिले में दर्ज की गई। वहीं, शिशु मृत्यु दर भी घटकर 5.03 पर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष 5.26 थी।