बिलासपुर। अवैध गोवंश परिवहन और तस्करी के मामलों में जब्त किए गए मवेशियों की अंतरिम कस्टडी को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल पर सुनवाई कर रहा है। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या आपराधिक मामलों में ट्रायल कोर्ट को जब्त गोवंश को अंतरिम रूप से किसी व्यक्ति या संस्था को सौंपने का अधिकार है या विशेष कानून के तहत इस पर रोक है।
मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच कर रही है। अदालत ने इस जटिल कानूनी मुद्दे पर सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता नौशीना आफरीन अली को न्याय मित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किया है। साथ ही राज्य के महाधिवक्ता को भी मामले में सहयोग के लिए उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
लार्जर बेंच के सामने रखा गया था कानूनी सवाल
हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्ष 2021 में इसे बड़े पीठ (लार्जर बेंच) के समक्ष भेजा था। मुख्य सवाल यह है कि पुलिस द्वारा गोवंश जब्त किए जाने के बाद क्या मजिस्ट्रेट अदालत को उन मवेशियों को अंतरिम रूप से सुपुर्द करने का अधिकार है या छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 की विशेष धाराएं इस अधिकार को सीमित करती हैं।
याचिकाकर्ता पहले ही हो चुका है बरी
2 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता मोहम्मद वासिम कुरैशी की ओर से अधिवक्ता ऋषिकांत महोबिया ने बताया कि मूल मामले में ट्रायल पूरा हो चुका है और याचिकाकर्ता को दोषमुक्त कर दिया गया है। हालांकि, डिवीजन बेंच ने कहा कि व्यक्तिगत विवाद खत्म होने के बावजूद कानूनी प्रश्न का समाधान जरूरी है, ताकि भविष्य के मामलों में स्पष्टता बनी रहे।
राज्य सरकार ने मांगा समय
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने कोर्ट से मामले का अध्ययन करने और तैयारी के लिए समय मांगा। अदालत ने अनुरोध स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 15 जुलाई को तय की है।
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि न्याय मित्र को याचिका, सभी दस्तावेजों और अब तक की कार्यवाही से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए, ताकि मामले में कानूनी पक्षों का विस्तृत अध्ययन किया जा सके।