नई दिल्ली। अभिनेता और भाजपा सांसद रवि किशन के पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) की सुरक्षा को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि रवि किशन के नाम, तस्वीर, आवाज और पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल कर बनाए गए आपत्तिजनक और भ्रामक कंटेंट को हटाया जाए।
जस्टिस ज्योति सिंह की एकल पीठ ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की छवि और पहचान का अनधिकृत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मानहानिकारक, अश्लील और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री के प्रसार पर रोक लगाते हुए संबंधित प्लेटफॉर्म्स को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
72 घंटे के भीतर हटाना होगा कंटेंट
अदालत ने Google, Meta Platforms और X Corp समेत सोशल मीडिया कंपनियों को आदेश दिया है कि कोर्ट के निर्देश मिलने के बाद 72 घंटे के भीतर संबंधित वेब लिंक और आपत्तिजनक सामग्री को हटाया जाए।
कोर्ट ने कहा कि यदि कंटेंट अपलोड करने वाले व्यक्ति, संस्थान या डोमेन रजिस्ट्रार आदेश की प्रति मिलने के तीन दिन के भीतर सामग्री नहीं हटाते हैं, तो सोशल मीडिया कंपनियों को खुद कार्रवाई करनी होगी।
AI-जनरेटेड कंटेंट को लेकर दायर की थी याचिका
रवि किशन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कुछ वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनकी छवि से जुड़ी AI-जनरेटेड अश्लील और अपमानजनक सामग्री प्रसारित की जा रही है।
याचिका में उन्होंने अपने नाम, आवाज, तस्वीर और व्यक्तित्व के व्यावसायिक इस्तेमाल को भी पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन बताया।
रेडियो सेगमेंट को लेकर भी जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान रवि किशन की ओर से एक रेडियो सेगमेंट का भी जिक्र किया गया, जिसमें कथित तौर पर उनकी पहचान से मिलती-जुलती छवि और नाम का इस्तेमाल किया गया था। याचिका में इसे भी उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन बताया गया।
कोर्ट ने इस मामले में संबंधित कंपनी के खिलाफ निषेधाज्ञा (इंजंक्शन) आदेश जारी किया है।
15 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर की तारीख तय की है। अदालत के आदेश के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रवि किशन से जुड़े अनधिकृत कंटेंट को हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी।