रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में आयोजित प्रदेश स्तरीय समारोह में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, शिक्षा, त्याग और अखंड भारत के संकल्प का प्रेरणादायक उदाहरण है।
मुख्यमंत्री साय ने घोषणा की कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति को स्थायी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ के सभी संभागीय और जिला मुख्यालयों में उनकी प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके लिए राज्य सरकार ने 10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक महान शिक्षाविद भी थे। उन्होंने बताया कि मात्र 33 वर्ष की आयु में डॉ. मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति बने और स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय मंत्री पद छोड़ना स्वीकार किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में ‘एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान’ की व्यवस्था के विरोध में डॉ. मुखर्जी ने संघर्ष किया और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता के लिए अपना बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश डॉ. मुखर्जी के विचारों और सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। धारा 370 हटाने, अंत्योदय आधारित विकास और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाले फैसलों को उन्होंने ऐतिहासिक कदम बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अंत्योदय के विचारों को आधार बनाकर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में सरकार ने कई जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाया है।
उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचालित नियद नेल्लानार योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि 500 से अधिक गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया गया है और 700 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रसेवा, शिक्षा और समर्पण के आदर्शों को अपनाकर विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में योगदान दें।
कार्यक्रम में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल, कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र कुमार पटेल, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।