हलचल… नाक+कटी या नकटी, पोस्टिंग पाना है तो तीरथ करना ही पड़ेगा, मूणत बने राजेश, कांग्रेस में बदलाव का इंतजार, लटक गई कलेक्टरों की लिस्ट, आईपीएस अफसरों को भी इंतजार, विधानसभा सत्र और जनता में आक्रोश

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नाक+कटी या नकटी

रायपुर के नकटी गाँव में भरी बरसात में सरकारी बुलडोजर कहर बनकर टूट पड़ा। यहाँ गाँव का गाँव उजाड़ दिया गया। कहते हैं कि यहाँ अमीर नेताओं के लिए गरीबों की झोपडिय़ों उजाड़ दी गई। प्रधानमंत्री द्वारा दिये गये कई आवासों में भी बेरहमी से बुलडोजर चला दिया गया। यही नहीं राजधानी रायपुर में 50 साल से राजनीति कर रहे कद्दावर नेता रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की राजनीति में भी बुलडोजर चलाने से परहेज नहीं किया गया। दरअसल बृजमोहन अग्रवाल नकटी गाँव पहुँचकर यहाँ के निवासियों को आश्वासन देकर आये थे कि उनकी सरकार बरसात में गरीबों का घरौंदा नहीं उजाड़ेगी, लेकिन बृजमोहन के आश्वासन के बाद सरकारी बुलडोजर डबल स्पीड से गरीबों के घर पर टूट पड़े। निश्चित ही यहाँ गरीबों के घर में ही नहीं बल्कि बृजमोहन अग्रवाल की 50 साल की राजनीति में भी बुलडोजर चला दिया गया है। तो वहीं राजनीति में युवाओं के आइकॉन कहे जाने वाले आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी की विश्वसनीयता पर भी संकट खड़ा हो गया है। दरअसल ओपी चौधरी की विश्वसनीयता पर संकट इसलिए खड़ा हो रहा है क्योंकि एक कथित टेप में भाजपा का एक मंडल अध्यक्ष आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी को फोन करता है और घटना के बारे में जानकारी देता है, तो मंत्री ओपी चौधरी ख़ुद ही अपना पीए बनकर बात करते हुए भाजपा के इस कार्यकर्ता से सरासर झूठ बोल देते हैं कि मंत्री जी सोने चले गये हैं, सुबह उन्हें बता देंगे। खैर यह टेप सच है या झूठ? यह तो ओपी चौधरी ही जानेंगे। लेकिन उनके इस ऑडियो के बाद उनकी सोच और भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रति उनके राजनीतिक दृष्टिकोण का खुलासा हो गया है। निश्चित ही ओपी चौधरी की मंशा अच्छी हो सकती हैं लेकिन यहाँ एक जवाबदार मंत्री का यह चरित्र बिलकुल सही नहीं माना जा सकता। यदि ओपी चौधरी का यह टेप झूठा था तो अब तक इस मामले में एफआइआर दर्ज क्यो नहीं कराया गया? खैर यह राजनीति का असली चरित्र है, ओपी तो सिर्फ बेनकाब हुए हैं। अब लोग कह रहे हैं यह नकटी है या नाक+कटी।

पोस्टिंग पाना है तो तीरथ करना ही पड़ेगा

कहते हैं कि वन विभाग बड़ी सर्जरी करने जा रहा है। इसी सप्ताह कई डीएफओ बदले जाएँगे। लेकिन ट्रांसफर से पहले आईएफएस अफसरों को तीरथ करना आवश्यक है। क्योंकि सुनने में यह आ रहा है कि बिना धरम- करम, तीरथ-धाम के वनमंडल में पोस्टिंग नहीं मिलने वाली। खैर धरम-करम में किसी को कोई आपत्ति भी नहीं है, लेकिन तीरथ करना काफी खर्चीला है। ऐसे में आईएफएस अफसर तीरथ करने से काफी दुखी हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि कुछ अफसरों की तीरथ यात्रा ना होने के कारण यह संभावित लिस्ट भी अटक गई है। कुल मिलाकर वन विभाग में पोस्टिंग पाना है तो तीरथ करना ही पड़ेगा।

मूणत बने राजेश

कभी रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत भाजपा की राजनीति के सबसे बदनाम नेता कहे जाते थे। दरअसल यहाँ बदनामी का आशय भाषा से है। मंत्री रहते हुए मूणत भाजपा कार्यकर्ताओं, अफसरों और यहाँ तक की जनता से भी सीधे मुँह बात नहीं करते थे। उसके पीछे राजनीतिक तर्क यह है कि उनके ऊपर भाजपा के एक बड़े नेता का हाथ रहा। शायद यही कारण है कि मूणत दो-दो बार मंत्री रहे और उनके पास बड़े-बड़े विभागों के दायित्व भी रहे। डॉ रमन सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए कार्यकर्ता तो दूर भाजपा पदाधिकारी भी मूणत के सामने बोलने से थर्राते थे। लेकिन अपने भाषायी चरित्र के कारण सत्ता के उफान में रहे मूणत कभी राजेश नहीं बन पाये। वक्त बदला मूणत को अब एक कार्यकर्ता भी मुँह पर बोलकर चला जाता है कि आपसे मिलने नहीं आया हूँ। उन्हें खरी-खोटी भी सुना देता है, तीन साल तक नहीं आया, आगे भी नहीं आऊँगा। लेकिन मूणत अपने स्वभाव के विपरीत बड़ा दिल कर कार्यकर्ताओं से बात करते हैं। निश्चित ही मूणत का यह स्वभाव उन्हें अब राजेश बनाने जा रहा है। दरअसल राजेश का मतलब होता है राजाओं का राजा अथवा शासक, एक अच्छे शासक में जनता के प्रति ऐसे गुण होना बेहद आवश्यक है। यह मूणत में बड़ा बदलाव है। निश्चित ही राजेश मूणत का यह चरित्र उन्हें मूणत से राजेश बनाने में मदद करेगा।

कांग्रेस में बदलाव का इंतजार

राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास के बाद यह माना जा रहा है की जल्द ही कांग्रेस में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। वर्तमान पीसीसी चीफ दीपक बैज का कार्यकाल पूरा हो चुका है, और अब नये प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति होनी है। इस रेस में पूर्व सीएम भूपेश बघेल, पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव, नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू, उमेश पटेल के नाम शामिल हैं। लेकिन भाजपा ने राज्य में मुख्यमंत्री की कमान सरल और आदिवासी नेता विष्णुदेव साय को दे रखा है। ऐसे मे कहीं ना कहीं कांग्रेस भी प्रदेश अध्यक्ष की कमान आदिवासी नेता को फिर से सौपना चाहती है, जिसके कारण नियुक्ति में विलंब हो रहा है। लेकिन इस बीच कई और नये समीकरण बनते दिख रहे हैं। फिलहाल कांग्रेस फिर किसी आदिवासी नेता को प्रदेश की कमान सौपेंगी या उपरोक्त दावेदारों में से किसी एक को कमान सौंपी जायेगी, इसका खुलासा इसी महीने हो जाएगा।

लटक गई कलेक्टरों की लिस्ट, आईपीएस अफसरों को भी इंतजार

राज्य सरकार ने सुशासन तिहार बीतने के बाद कुछ कलेक्टरों को हटाने का मन बना लिया है। इसके लिए नये कलेक्टरों पर भी विचार भी किया जा चुका है। लेकिन यह लिस्ट लटक गई है। कलेक्टर बनने वाले अफसरों के लिए एक-एक दिन भारी पड़ रहा है, आखिर लिस्ट कब निकलेगी? अफसर राह देख रहे हैं। संभव है कि विधानसभा के मानसून सत्र तक कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों की लिस्ट रोक दी जाये। हालाँकि कहा तो यह भी जा रहा कि एक कलेक्टर के कारण बाकी लिस्ट भी रुक गई है तो वहीं आईपीएस अफसर भी पोस्टिंग को लेकर टक-टकी लगाये हुए हैं।

विधानसभा सत्र और जनता में आक्रोश

13 जुलाई से छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र आहुत किया गया है। यह सत्र काफी हंगामेदार हो सकता है। दरअसल विभिन्न कारणों से इन दिनों पूरे प्रदेश में सरकार के लिए एक नकारात्मक दृष्टिकोण बनते जा रहा है। पहले बैकुण्ठपुर में हुए ट्रिपल हत्याकांड में सरकार की भद्द पिट चुकी है। यहाँ रेत के काले कारोबार ने गैंगवार को जन्म दिया और वह खौफनाक अंजाम तक पहुँच गया, लेकिन सरकार को घटना के बाद भनक लगी। काफी टाइम बीत जाने के बाद मामले में सीबीआई जाँच का ऐलान कर दिया गया है। दरअसल कहा जा रहा है कि रेत के इस काले कारोबार के पीछे भाजपा नेताओं का ही हाथ हैं। खैर अब सीबीआई तह तक पहुँचकर खुलासा करेगी कि असली सच क्या है? तो वहीं यह मामला ठंडा नहीं हुआ था की राजधानी के नकटी गाँव में गरीबों को रौंद दिया गया। उनको भरे बरसात में घर विहीन कर दिया गया। निश्चित ही सरकार इन मामलों में विधानसभा में घिरने जा रही है। कांग्रेस इन तमाम मामलों का राजनीतिक फायदा लेने को तैयार बैठी है, तो वहीं तकरीबन 1300 सवालों की बौछार भी होगी। कहीं ना कहीं यह तमाम मामले सरकार के लिये बड़ा नुकसान करते दिख रहे हैं।

editor.pioneerraipur@gmail.com

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