न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने सशस्त्र संघर्ष के दौरान बच्चों और शैक्षणिक संस्थानों पर हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। भारत ने कहा कि स्कूलों और बच्चों को निशाना बनाने वालों को जवाबदेह ठहराए बिना उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पी. ने सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कहा कि युद्ध और हिंसा के हालात में भी शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का मूल अधिकार है और इसकी रक्षा करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को सीखने, आगे बढ़ने और अपनी क्षमताओं को विकसित करने का अवसर देना स्थायी शांति की नींव है। भारत सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित बच्चों की सुरक्षा और उनके शिक्षा के अधिकार को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
‘स्कूलों को निशाना बनाने वालों पर हो कार्रवाई’
भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि केवल सुरक्षा के वादे पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है जो जानबूझकर बच्चों और स्कूलों को निशाना बनाते हैं।
राजदूत हरीश पी. ने कहा कि “जवाबदेही के बिना सुरक्षा अधूरी है।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
संघर्ष क्षेत्रों में बच्चों की स्थिति पर चिंता
बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया, जिसमें बताया गया कि 2025 में सशस्त्र संघर्षों के दौरान बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन चिंताजनक स्तर तक पहुंच गया। कई बच्चे हिंसा, हमलों और शिक्षा से वंचित होने जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
भारत ने कहा कि बच्चों और स्कूलों की सुरक्षा केवल मानवीय मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता से जुड़ा विषय है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संघर्षों की भेंट न चढ़े।