लंदन। दुनिया में पहली बार ऐसा मामला सामने आया है जहां एक AI चैटबॉट ने अदालत में केस लड़कर जीत हासिल की और अपने क्लाइंट को लगभग ₹8.79 लाख (7,000 पाउंड) दिलवा दिए।
यह केस ब्रिटेन में हुआ, जहां “गारफील्ड एआई” (Garfield AI) नाम के लीगल AI सिस्टम ने एक फ्रीलांस एचआर प्रोफेशनल का विवादित भुगतान से जुड़ा मामला लड़ा।
कैसे लड़ा गया केस?
रिपोर्ट के मुताबिक, AI सिस्टम ने न सिर्फ केस की कानूनी तैयारी की, बल्कि दस्तावेज, गवाहों के बयान और दलीलें भी तैयार कीं। इसके बाद अदालत में सुनवाई के दौरान AI द्वारा तैयार किए गए दस्तावेजों और रणनीति के आधार पर केस पेश किया गया।
मामले की सुनवाई वैंड्सवर्थ काउंटी कोर्ट (Wandsworth County Court) में करीब तीन घंटे चली, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से कानूनी प्रतिनिधि मौजूद थे।
कम खर्च में बड़ा फायदा
जिस केस में आमतौर पर हजारों पाउंड वकीलों की फीस लग सकती थी, वह मामला AI की मदद से सिर्फ लगभग 400 पाउंड (करीब ₹50,000) में निपट गया।
कोर्ट ने अंततः AI की मदद से केस लड़ने वाले पक्ष के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें भुगतान दिलाने का आदेश दिया।
क्या है Garfield AI?
Garfield AI एक ऐसी लीगल टेक्नोलॉजी फर्म है जिसे ब्रिटेन के नियामक प्राधिकरण से छोटे कानूनी मामलों में सेवाएं देने की अनुमति मिली है। यह सिस्टम खासकर छोटे वित्तीय विवादों (small claims) को सुलझाने में मदद करता है।
इसके संस्थापक फिलिप यंग (Philip Young) हैं, जिन्होंने इसे दुनिया की पहली AI-आधारित लीगल सर्विस सिस्टम में से एक बताया है।
क्यों खास है यह मामला?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना कानूनी दुनिया में AI की भूमिका को लेकर बड़ा बदलाव संकेत करती है। जहां पहले AI केवल डॉक्यूमेंट ड्राफ्टिंग या रिसर्च तक सीमित था, अब यह सीधे कोर्ट प्रक्रिया में प्रभाव डालता दिख रहा है।
आगे क्या?
हालांकि यह केस छोटे वित्तीय विवाद से जुड़ा था, लेकिन इससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या भविष्य में AI वकीलों की जगह ले सकता है या सिर्फ सहायक भूमिका तक सीमित रहेगा।