रायपुर | सुकमा जिले में किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के संयुक्त तत्वावधान में ‘खेती बचाओ अभियान’ के तहत एक दिवसीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जिले के तीनों विकासखंडों से पहुंचे 500 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया और टिकाऊ कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप ने किसानों और मत्स्य पालकों को विभिन्न योजनाओं के तहत कृषि सामग्री वितरित की। इस दौरान 4 मत्स्य पालकों को आधुनिक जाल और आइस बॉक्स प्रदान किए गए, जिससे उन्हें मछलियों के सुरक्षित भंडारण और बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। वहीं किसानों को उन्नत किस्म के बीज भी निःशुल्क वितरित किए गए।
कार्यशाला में कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन और पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक खाद निर्माण, फसल विविधीकरण और कम लागत वाली कृषि पद्धतियों की जानकारी दी। किसानों को रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
सांसद श्री महेश कश्यप ने किसानों से जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि दंतेवाड़ा की तरह सुकमा को भी जैविक जिला बनाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं तथा कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन से किसान आत्मनिर्भर बनेंगे और उनकी आय में वृद्धि होगी।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर, सहायक संचालक मछली पालन श्री उदय सबनक, उप संचालक कृषि श्री पी.आर. बघेल सहित विभागीय अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
‘खेती बचाओ अभियान’ का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।