रायपुर। बच्चों में बढ़ते मधुमेह, विशेष रूप से टाइप-1 डायबिटीज (बाल मधुमेह) की समय पर पहचान और उपचार को लेकर जशपुर जिले में स्वास्थ्यकर्मियों का तीन दिवसीय विशेष उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा 15 से 17 जून 2026 तक किया गया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को बाल मधुमेह के लक्षणों, उपचार, फॉलोअप और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाना था।
300 स्वास्थ्यकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण
कार्यक्रम में कुनकुरी, मनोरा, जशपुर और दुलदुला विकासखंडों से कुल 300 स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। इसमें सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO), मितानिन कार्यक्रम से जुड़े समन्वयक, मितानिन प्रशिक्षक, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल हुए।
लक्षणों की पहचान और समय पर रेफरल पर जोर
विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि बच्चों में अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, अचानक वजन कम होना, लगातार थकान और ज्यादा भूख लगना टाइप-1 डायबिटीज के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों की समय पर पहचान कर बच्चों को उपचार से जोड़ना बेहद जरूरी है।
प्रशिक्षण में इंसुलिन उपयोग, रक्त शर्करा की निगरानी, संतुलित आहार, आपात स्थिति में प्रबंधन और परिवार व स्कूल की भूमिका पर भी जानकारी दी गई।
ग्राम स्तर तक पहुंचेगा जागरूकता अभियान
कार्यक्रम में स्वास्थ्यकर्मियों को समुदाय और स्कूल स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की रणनीतियों के बारे में बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि मितानिनों, CHO और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. घनश्याम सिंह जात्रा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक राजीव रंजन मिश्रा, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जानकी भगत, जिला एनसीडी नोडल अधिकारी डॉ. उदय प्रकाश भगत सहित अन्य विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण को सफल बनाने में सहयोग दिया।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि आने वाले समय में बाल मधुमेह और अन्य गैर-संचारी रोगों को लेकर जागरूकता अभियान, स्क्रीनिंग कार्यक्रम और सहायता समूहों की बैठकें आयोजित की जाएंगी।