कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका लगा है। टीएमसी की फायरब्रांड नेता और जादवपुर से सांसद सयानी घोष का नाम भी कथित तौर पर बागी सांसदों की लिस्ट में शामिल हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अलग व्यवस्था देने की मांग की है। इस पत्र पर सयानी घोष के हस्ताक्षर भी होने का दावा किया जा रहा है। इसके बाद बंगाल की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
ममता की करीबी नेताओं में गिनी जाती हैं सयानी घोष
सयानी घोष को ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बाद टीएमसी के बड़े चेहरों में गिना जाता रहा है। वह पार्टी की युवा और मुखर नेताओं में शामिल रही हैं। राजनीतिक गलियारों में उन्हें टीएमसी के भविष्य के चेहरों में भी देखा जाता रहा है।
सयानी घोष बंगाली फिल्मों की अभिनेत्री और गायिका भी रह चुकी हैं। विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उनका गाया हुआ गाना ‘मेरे दिल में है काबा और आंखों में मदीना’ काफी चर्चा में आया था। इस गाने को लेकर बीजेपी ने टीएमसी और ममता बनर्जी पर निशाना साधा था।
TMC में लगातार बढ़ रही बगावत
विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर होने के बाद टीएमसी के अंदर असंतोष बढ़ने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। पार्टी में नेताओं के इस्तीफे और बगावत ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
बताया जा रहा है कि टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग गुट बनाया है। इस गुट ने काकोली घोष को अपना चीफ व्हिप चुना है। इस लिस्ट में शताब्दी रॉय, देव, जून मालिया, प्रसून बनर्जी समेत कई नेताओं के नाम सामने आए हैं। अब सयानी घोष का नाम जुड़ने से पार्टी में नई हलचल शुरू हो गई है।
राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे से भी बढ़ी परेशानी
टीएमसी को राज्यसभा में भी झटके लगे हैं। पार्टी के सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के बाद अब ममता की करीबी मानी जाने वाली सांसद सुष्मिता देव ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। सुष्मिता देव ने पार्टी की सदस्यता भी छोड़ दी है।
इस्तीफा देने के बाद उनकी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा से मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है।
सयानी घोष के बागी गुट में शामिल होने की खबर ने टीएमसी के अंदर चल रही उठापटक को और गहरा कर दिया है। अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में पार्टी के कितने और नेता ममता बनर्जी का साथ छोड़ते हैं।