रायपुर। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने राज्य के करीब 600 बिल्डरों को नोटिस जारी करते हुए बड़ी कार्रवाई शुरू की है। इनमें अविनाश ग्रुप, वॉलफोर्ट, सिंघानिया बिल्डकॉन सहित कई प्रमुख बिल्डर शामिल हैं। यह कार्रवाई उन परियोजनाओं को लेकर की गई है, जो पूर्ण हो चुकी हैं लेकिन अब तक उनका प्रबंधन रहवासी समितियों को नहीं सौंपा गया है।
रेरा के अनुसार, प्रदेश के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा समेत विभिन्न जिलों की लगभग 989 आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं में यह अनियमितता सामने आई है। शिकायतों के आधार पर यह पाया गया कि कई बिल्डरों ने प्रोजेक्ट पूरा होने और पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी सामान्य क्षेत्रों, सुविधाओं और प्रबंधन का हस्तांतरण फ्लैट खरीदारों की सोसायटी या संघ को नहीं किया।
रेरा नियमों के मुताबिक, किसी भी परियोजना के पूरा होने के बाद बिल्डर को कॉलोनी का प्रबंधन और रखरखाव जिम्मेदारी अनिवार्य रूप से निवासियों की समिति को सौंपना होता है। लेकिन कई मामलों में बिल्डरों द्वारा अभी भी रखरखाव शुल्क वसूला जा रहा है, जो नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।
इस कार्रवाई के दायरे में हाउसिंग बोर्ड और कुछ नगर निकायों के प्रोजेक्ट भी आए हैं, जहां तय प्रक्रिया के अनुसार हैंडओवर नहीं किया गया।
रेरा ने इसे रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 11(4)(ई) और धारा 17 का उल्लंघन बताया है। प्राधिकरण ने सभी संबंधित बिल्डरों को 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। समय पर जवाब नहीं मिलने या संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देने पर आगे कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
रेरा ने यह भी स्पष्ट किया है कि फ्लैट खरीदारों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपनी सोसायटी या एसोसिएशन के गठन में सक्रिय भूमिका निभाएं।
यह कार्रवाई रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।