नई दिल्ली | शांत दिखने वाला हमारा सूर्य इस समय बेहद सक्रिय और आक्रामक है। सूर्य की सतह पर हाल ही में एक भयंकर सौर विस्फोट हुआ है, जो सीधे धरती की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) और स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर ने इस घटना को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है।
नासा के अनुसार, सौर तूफान पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराने वाला है, और इसके चलते G3 श्रेणी का भू-चुंबकीय तूफान (जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म) उत्पन्न हो सकता है। इसके प्रभाव से भारत के उत्तरी हिस्सों, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में आसमान में अद्भुत चमक देखने को मिल सकती है। इसे विज्ञान में ऑरोरा या उत्तरी रोशनी कहा जाता है।
सोलर फ्लेयर और फिलामेंट इरप्शन:
सूर्य की सतह पर ‘एक्टिव रीजन 4461’ में 6 जून की सुबह M1.8 श्रेणी का शक्तिशाली सोलर फ्लेयर हुआ। इसके केंद्र से अत्यधिक चुम्बकीय और भारी ‘फिलामेंट’ निकला, जो इस समय 1,400 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। वैज्ञानिक इसे ‘टेक्स्टबुक कोर फिलामेंट इरप्शन’ कहते हैं, यानी यह विस्फोट सीधे पृथ्वी के वायुमंडल को प्रभावित कर सकता है।
चुंबकीय क्षेत्र का S-शेप:
इस फिलामेंट के स्रोत क्षेत्र की चुंबकीय रेखाएं ‘S’ अक्षर की तरह उलझी हुई थीं। इस तरह के तनाव के कारण जब रेखाएं टूटती हैं और फिर जुड़ती हैं, तो शक्तिशाली एक्स-रे विकिरण उत्पन्न होता है, जिससे रेडियो संचार और उपग्रह प्रणाली प्रभावित हो सकती है।
भारत में उत्तरी रोशनी का नजारा:
चार्ज्ड सौर कण जब पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल से टकराते हैं, तो हरे, लाल और बैंगनी रंग की चमक पैदा होती है। सामान्य परिस्थितियों में यह केवल ध्रुवीय क्षेत्रों में दिखाई देती है, लेकिन G3 या उससे अधिक श्रेणी के तूफान में यह उत्तरी भारत के ऊंचे क्षेत्रों जैसे लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी देखा जा सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सोमवार या मंगलवार की रात को, यदि आसमान साफ और अंधेरा रहा, तो ये रोशनी साफ दिखाई दे सकती है।
नासा और स्पेस मौसम विशेषज्ञों ने लोगों से कहा है कि वे रेडियो और उपग्रह संचार पर संभावित प्रभावों के प्रति सतर्क रहें।