कोलकाता | पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्यभर में संचालित मदरसों का व्यापक सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत सभी जिला मजिस्ट्रेटों को अपने-अपने क्षेत्रों में मदरसों की विस्तृत जानकारी एकत्र करने और रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी आदेश के अनुसार, इस सर्वे में सरकारी सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त, निजी, गैर-सहायता प्राप्त और बिना मान्यता वाले सभी मदरसों को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था की स्थिति, बुनियादी सुविधाओं, छात्र संख्या और शैक्षणिक गतिविधियों का विस्तृत और प्रमाणिक डेटा तैयार करना है।
प्रशासन का कहना है कि इस पहल से शिक्षा योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने, बच्चों के कल्याण कार्यक्रमों को मजबूत करने और संस्थानों की निगरानी में सुधार करने में मदद मिलेगी। साथ ही किसी भी संभावित अनियमितता या अवैध गतिविधि की पहचान कर आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सर्वे किसी भी संस्थान को बंद करने या छात्रों पर किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई के लिए नहीं है। सभी मदरसे मौजूदा शैक्षणिक सत्र में सामान्य रूप से कार्य करते रहेंगे।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राज्य में लगभग 614 सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त मदरसे तथा 601 गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं। बिना मान्यता वाले मदरसों की संख्या का कोई आधिकारिक आंकड़ा फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
जिला प्रशासन को यह रिपोर्ट 5 जुलाई तक राज्य सरकार को सौंपनी होगी। इस फैसले के बाद राज्य में शिक्षा और धार्मिक संस्थानों से जुड़े मुद्दों पर नई बहस शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।