कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में टीएमसी (TMC) के अंदर उठती फूट के बीच पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बड़ा कदम उठाया है। ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की सभी कमेटियों और फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि सभी कमेटियों और फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन का पुनर्गठन किया जाएगा।
टीएमसी ने बयान में कहा कि यह कदम पार्टी के आत्मनिरीक्षण, परफॉर्मेंस रिव्यू और संगठनात्मक मूल्यांकन (Organizational Assessment) के तहत उठाया गया है। इसके परिणामों के आधार पर पैरेंट बॉडी और सभी फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन का संगठनात्मक ढांचा फिर से तैयार किया जाएगा। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य संगठन को मजबूत बनाना और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करना है।
टीएमसी के कुल 16 फ्रंटल संगठन हैं, जो पार्टी के युवा, महिला, छात्र और मजदूर वर्गों को संगठित करते हैं। इसके अलावा मुख्य कार्यकारी कमेटी, कोर कमेटी, स्टेट कमेटी, जिला और ब्लॉक कमेटी और अनुशासन समिति को भी भंग कर दिया गया है।
इस कदम के बीच बागी विधायकों ने पार्टी पर दावा ठोका है। बंगाल विधानसभा में टीएमसी के 80 में से लगभग 50 विधायक अलग गुट के समर्थन का दावा कर रहे हैं। बागी विधायक रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने का दावा करते हुए स्पीकर रथिन घोष को पत्र सौंपा है। इस स्थिति ने ममता बनर्जी के सामने पार्टी पर नियंत्रण बनाए रखने की चुनौती बढ़ा दी है।
टीएमसी सूत्रों का कहना है कि संगठनात्मक रीस्टक्चर का उद्देश्य पार्टी को नई ऊर्जा और स्पष्ट मकसद के साथ भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करना है।