नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री के दौरान संपत्ति का मूल्य कम दिखाकर स्टाम्प ड्यूटी बचाने वालों के खिलाफ सरकार ने सख्त कदम उठाया है। दिल्ली राजस्व विभाग ने सभी सब-रजिस्ट्रार और संयुक्त सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया की गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं।
सर्कुलर के अनुसार, अब संपत्ति के घोषित मूल्य और सरकारी निर्धारित सर्कल रेट (Circle Rate) का विशेष मिलान किया जाएगा। यदि कोई संपत्ति सर्कल रेट से कम मूल्य पर पंजीकृत होती है, तो संबंधित पक्षों को पहले दस्तावेज सुधारने और सही स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान करने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर भुगतान नहीं होता है, तो मामला स्टाम्प कलेक्टर को भेजा जाएगा, जो 3 महीने के भीतर जांच पूरी करेगा।
इस प्रक्रिया के तहत विशेष रूप से रिहायशी संपत्तियों के बेसमेंट और बिल्ट-अप एरिया के गलत आकलन पर ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि अक्सर अधिकतम प्लिंथ एरिया या कम दिखाए गए बिल्ट-अप एरिया के आधार पर संपत्ति का मूल्यांकन किया जाता है, जिससे सरकार को स्टाम्प ड्यूटी में नुकसान होता है।
सर्कुलर इंडियन स्टाम्प एक्ट, 1899 की धारा 47-A और दिल्ली स्टाम्प (प्रिवेंशन ऑफ अंडर-वैल्यूएशन ऑफ इंस्ट्रूमेंट्स) रूल्स, 2007 के तहत लागू किया गया है। इसका उद्देश्य संपत्ति पंजीकरण में पारदर्शिता लाना और सरकार को होने वाले राजस्व हानि को रोकना है।
राजस्व विभाग ने कहा कि अब प्रॉपर्टी मालिकों को अपनी संपत्ति का प्लिंथ एरिया और बिल्ट-अप एरिया स्पष्ट रूप से घोषित करना होगा, और स्टाम्प ड्यूटी की गणना केवल भूमि के मूल्य पर नहीं, बल्कि घोषित क्षेत्रफल और निर्माण लागत के आधार पर की जाएगी।