JEE में शानदार प्रदर्शन के बावजूद 75% नियम बना बाधा, CBSE री-इवैल्यूएशन से छात्रों को उम्मीद

नई दिल्ली। JEE Main और JEE Advanced में शानदार प्रदर्शन के बावजूद कई छात्रों के लिए 12वीं कक्षा में 75 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता बड़ी चुनौती बन गई है। JoSAA काउंसलिंग 2026 की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

देशभर में ऐसे हजारों छात्र हैं जिन्होंने JEE में अच्छी रैंक हासिल की है, लेकिन CBSE बोर्ड परीक्षा में 75% का न्यूनतम मानदंड पूरा नहीं कर पाए हैं। इसके चलते IIT, NIT, IIIT और GFTI जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश को लेकर उनकी चिंता बढ़ गई है।

अब इन छात्रों की नजर CBSE की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया पर टिकी है, जिसमें वे उम्मीद कर रहे हैं कि कुछ अतिरिक्त अंक मिलने से उनकी पात्रता पूरी हो सकती है।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा वर्ष 2017 में लागू किए गए नियम के अनुसार, इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों को 12वीं कक्षा में कम से कम 75% अंक (SC/ST के लिए 65%) प्राप्त करना अनिवार्य है। हालांकि JEE रैंकिंग में 12वीं के अंकों का वेटेज समाप्त कर दिया गया है, लेकिन न्यूनतम योग्यता शर्त अभी भी लागू है।

कोरोना महामारी के दौरान 2021 और 2022 में इस नियम में अस्थायी राहत दी गई थी, जिससे छात्रों को बिना 75% की बाधा के प्रवेश का अवसर मिला था। इसी वजह से अब एक बार फिर राहत की उम्मीदें जताई जा रही हैं।

इस बीच CBSE ने 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कई छात्र जिनके अंक सीमा के बेहद करीब हैं, वे उम्मीद कर रहे हैं कि री-इवैल्यूएशन से उनके कुल प्रतिशत में सुधार हो सकता है।

कुछ छात्र संगठनों ने ग्रेस मार्क्स देने की भी मांग उठाई है, ताकि किसी तकनीकी या मूल्यांकन त्रुटि के कारण प्रभावित छात्रों को राहत मिल सके। हालांकि अभी तक CBSE या शिक्षा मंत्रालय की ओर से इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

फिलहाल मौजूदा नियमों के अनुसार पात्रता शर्तें लागू हैं और छात्रों को JoSAA काउंसलिंग की समय-सीमाओं का पालन करने की सलाह दी जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट होने की उम्मीद है, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य तय होगा।

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