कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीतिक चुनौतियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के कई नेताओं के इस्तीफे और बढ़ती अंदरूनी असंतोष के बीच ममता बनर्जी ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए ‘गिरगिट’ शीर्षक से एक कविता लिखी है, जिसकी राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है।
बंगाली भाषा में लिखी गई इस कविता में ममता बनर्जी ने उन नेताओं की तुलना गिरगिट से की है, जो परिस्थितियों और व्यक्तिगत हितों के अनुसार अपना रंग बदल लेते हैं। कविता में उन्होंने लिखा कि कुछ लोग गिरगिट से भी अधिक खतरनाक होते हैं, क्योंकि वे आर्थिक लाभ और निजी महत्वाकांक्षाओं के लिए अपना चरित्र और विचार तेजी से बदल लेते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कविता उन नेताओं के लिए एक अप्रत्यक्ष संदेश है, जिन्होंने हाल के दिनों में टीएमसी से दूरी बना ली है या पार्टी नेतृत्व की आलोचना शुरू कर दी है।
TMC में बढ़ रही है बगावत
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से तृणमूल कांग्रेस को लगातार झटके लग रहे हैं। भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े मामलों में कई नेताओं पर कार्रवाई हो रही है, वहीं पार्टी के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।
हाल ही में हुगली जिले की भद्रेश्वर नगरपालिका के चेयरमैन समेत आठ पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। इससे पहले राज्य की विभिन्न नगरपालिकाओं से टीएमसी के 101 पार्षद भी अपने पद छोड़ चुके हैं।
एक के बाद एक इस्तीफों से बढ़ी चिंता
उत्तर बैरकपुर, गारुलिया, कोंटाई, हालिसहार, भाटपाड़ा और डायमंड हार्बर समेत कई इलाकों में टीएमसी पार्षदों के इस्तीफों ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि डायमंड हार्बर को टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता है और यहां से ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी सांसद हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लगातार हो रहे इस्तीफों और नेताओं के पार्टी छोड़ने से ममता बनर्जी पर दबाव बढ़ा है। ऐसे माहौल में उनकी ‘गिरगिट’ कविता को पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और दल-बदल की राजनीति पर तीखी प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल ममता बनर्जी की यह कविता सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां इसे राजनीतिक संदेश और भावनात्मक प्रतिक्रिया दोनों रूपों में देखा जा रहा है।