सुप्रीम कोर्ट | सुप्रीम कोर्ट ने देश की न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों और देरी पर चिंता जताते हुए सभी हाईकोर्ट के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब किसी भी मामले में फैसला सुरक्षित (Reserved Judgment) रखे जाने के बाद उसे अधिकतम तीन महीने के भीतर सुनाया जाना अनिवार्य होगा।
जमानत से जुड़े मामलों में आदेश आदर्श रूप से अगले दिन जारी किए जाएंगे और उसी दिन जेल प्रशासन तक पहुंचाए जाएंगे। अंडरट्रायल कैदियों की रिहाई उसी दिन या अधिकतम अगले दिन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है।
नए दिशानिर्देशों के अनुसार, अदालत पहले आदेश का प्रभावी हिस्सा (Operative Part) खुले कोर्ट में सुनाएगी और विस्तृत कारण सात दिनों के भीतर संबंधित हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। साथ ही, जिस दिन फैसला सुरक्षित रखा गया हो, उसकी जानकारी भी वेबसाइट पर प्रदर्शित करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं होता है तो मामला किसी अन्य पीठ को सौंपा जा सकता है। वहीं, यदि फैसले के कारण 30 दिनों के भीतर अपलोड नहीं किए जाते हैं तो मामला वापस लेकर नई पीठ के समक्ष भेजा जाएगा।
सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया है कि वे इन दिशानिर्देशों को संबंधित मुख्य न्यायाधीशों के समक्ष प्रस्तुत करें और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।