AI | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भविष्य की सबसे बड़ी तकनीक माना जा रहा है, लेकिन अब कई बड़ी टेक कंपनियों के लिए यही तकनीक भारी खर्च और नई परेशानियों की वजह बनती दिख रही है। जिन कंपनियों ने कर्मचारियों की जगह AI सिस्टम और AI एजेंट्स को तेजी से अपनाया था, अब वही कंपनियां बढ़ती लागत और सीमित फायदे को लेकर चिंता जता रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राइड-हेलिंग कंपनी Uber का सालभर का AI बजट सिर्फ चार महीनों में ही खत्म हो गया। कंपनी के COO एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने माना कि AI पर किया गया निवेश उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं दे पा रहा है और इसकी लागत को सही ठहराना मुश्किल हो रहा है।
वहीं Microsoft भी कथित तौर पर अपने कर्मचारियों को AI टूल्स का सीमित इस्तेमाल करने की सलाह दे रही है, क्योंकि इन सेवाओं पर कंपनी का खर्च तेजी से बढ़ रहा है।
टेक इंडस्ट्री में पिछले कुछ वर्षों में AI को लेकर बड़ी होड़ देखने को मिली। कई कंपनियों ने कस्टमर सपोर्ट, डेटा मैनेजमेंट और इंटरनल ऑपरेशंस में इंसानी कर्मचारियों की जगह AI बॉट्स और एजेंट्स को तैनात किया। हालांकि अब कंपनियों को महसूस हो रहा है कि बड़े स्तर पर AI सिस्टम चलाना बेहद महंगा सौदा साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध AI ऐप्स और कंपनियों में इस्तेमाल होने वाले एडवांस AI सिस्टम में बड़ा अंतर है। कंपनियों को बड़े सर्वर, हाई-एंड प्रोसेसिंग और पेड AI मॉडल्स पर भारी रकम खर्च करनी पड़ती है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कई जगह AI एजेंट्स से तकनीकी गड़बड़ियां भी सामने आई हैं। उदाहरण के तौर पर Amazon के सिस्टम में AI आधारित बदलावों के कारण तकनीकी दिक्कतें आईं, जिसके बाद कंपनी को दोबारा इंसानी निगरानी बढ़ानी पड़ी।
इसी तरह Accenture ने बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी कर लागत घटाने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में सेटलमेंट और अन्य खर्च अनुमान से कहीं ज्यादा बढ़ गए।
अब टेक इंडस्ट्री में यह बहस तेज हो गई है कि क्या कंपनियों ने AI को जरूरत से ज्यादा तेजी से अपनाया। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि AI भविष्य जरूर है, लेकिन फिलहाल पूरी तरह इंसानों की जगह लेना उसके लिए आसान नहीं है।