बच्चों के पार्क की जमीन पर अवैध कॉलोनी! SDM रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई नहीं, नगर पालिका पर उठे सवाल

खैरागढ़। शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में सरकारी जमीन पर बनी कथित अवैध कॉलोनी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बच्चों के पार्क और मेंटेनेंस खसरा की जमीन पर अवैध प्लाटिंग की पुष्टि होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से नगर पालिका और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी आदेश और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद भी जिम्मेदार विभाग रसूखदारों के दबाव में खामोश बैठे हैं।

जानकारी के मुताबिक मामला सिविल लाइन स्थित प्लॉट नंबर 114 और 115 का है। सरकारी रिकॉर्ड में यह जमीन पहले एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क और बाड़ी के रूप में दर्ज थी। आजादी से पहले यहां “अल्फ्रेड पार्क” हुआ करता था। बाद में इस परिसर में राजा लालबहादुर सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई थी, जिसे बाद में हटाकर डोंगरगढ़ स्थित लाल निवास ले जाया गया। इसके बाद कथित तौर पर मेंटेनेंस खसरा की जमीन को टुकड़ों में बेचने का सिलसिला शुरू हो गया।

सरकारी जांच रिपोर्ट के अनुसार करीब एक लाख वर्गफीट से अधिक जमीन को लगभग 22 हिस्सों में बांटकर अलग-अलग लोगों के नाम दर्ज किया गया। कई प्लॉटों की दोबारा बिक्री भी हुई और अब वहां मकान, कॉम्प्लेक्स और अन्य निर्माण खड़े हो चुके हैं।

मामले में सबसे बड़ा खुलासा नगर एवं ग्राम निवेश विभाग की रिपोर्ट से हुआ, जिसमें साफ कहा गया कि इस जमीन का कोई वैध ले-आउट स्वीकृत नहीं किया गया था। यानी कॉलोनी काटने की अनुमति ही नहीं थी। इसके बावजूद वर्षों तक रजिस्ट्री, नामांतरण और निर्माण कार्य चलते रहे।

एसडीएम जांच के बाद रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय भेजी गई थी। इसके बाद नजूल शाखा ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र जारी कर छत्तीसगढ़ नगर पालिका कॉलोनाइजर नियमों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। लेकिन अब तक न तो अवैध निर्माणों पर कार्रवाई हुई और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्ती दिखाई गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकारी रिकॉर्ड में अवैध प्लाटिंग साबित हो चुकी है, तब कार्रवाई में देरी कई सवाल खड़े करती है। शहर में चर्चा है कि आखिर किन प्रभावशाली लोगों के दबाव में नगर पालिका कार्रवाई से बच रही है।

लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि बच्चों के पार्क और सरकारी मेंटेनेंस खसरा की जमीन भी सुरक्षित नहीं है, तो आम सरकारी जमीनों का भविष्य क्या होगा। मामला अब प्रशासनिक निष्क्रियता, प्रभावशाली लोगों के हस्तक्षेप और अवैध भू-कारोबार की ओर इशारा करता नजर आ रहा है।

फिलहाल शहरवासियों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *