होर्मुज के पास अमेरिका-ईरान तनाव फिर भड़का: सीजफायर उल्लंघन के आरोप, वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट की आशंका

तेहरान/वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान ने अमेरिका पर सीजफायर का उल्लंघन करने और होर्मुजगान प्रांत में सैन्य कार्रवाई करने का आरोप लगाया है, जबकि अमेरिका ने इसे आत्मरक्षा में की गई “डिफेंसिव स्ट्राइक” बताया है।

ईरानी विदेश मंत्रालय और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 26 मई को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास हुए कथित हमलों में मिसाइल ठिकानों और नौसैनिक गतिविधियों को निशाना बनाया गया। ईरान का दावा है कि यह कार्रवाई उस समय हुई जब क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए अस्थायी समझौते पर बातचीत जारी थी।

अमेरिका का पक्ष: आत्मरक्षा में कार्रवाई

दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई। अमेरिका का दावा है कि उसने उन ठिकानों को निशाना बनाया जो कथित तौर पर समुद्री मार्गों पर खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों में शामिल थे, जिसमें नौसैनिक सुरंगें बिछाने की कोशिशें भी शामिल थीं।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने संकेत दिया है कि क्षेत्र में स्थायी समझौते तक पहुंचने में अभी कुछ समय लग सकता है, जिससे कूटनीतिक अनिश्चितता और बढ़ गई है।

होर्मुज स्ट्रेट पर खतरा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, वहां तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर सीधा असर पड़ सकता है। अनुमान के अनुसार, दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी का परिवहन इसी मार्ग से होता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में इस क्षेत्र में समुद्री आवाजाही सीमित हुई है और कई टैंकरों को अस्थायी रूप से रोका गया है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है।

ईरान के आरोप और क्षेत्रीय स्थिति

ईरान ने दावा किया है कि उसके रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया और एयरस्पेस में घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम किया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

इसके साथ ही ईरान ने यह भी कहा है कि वह क्षेत्रीय वार्ता के तहत जब्त की गई संपत्तियों की वापसी और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा चाहता है।

वैश्विक चिंता बढ़ी

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों, शिपिंग लागत और ऊर्जा सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

फिलहाल, दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर युद्ध जैसे हालात की आशंका को बढ़ा दिया है।

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